शहरवासियों को लावारिस पशुओं से मिलेगी मुक्ति
नारनौल। शहरवासियों के लिए सिरदर्द बन चुके लावारिस पशुओं से अब लोगों को जल्द ही निजात मिलेगी। नगर परिषद ने लावारिस पशुओं को रखने के लिए खालड़ा की पहाड़ी के नजदीक 4 एकड़ जमीन पर करीब 40 लाख रुपये की लागत से गोशाला का निर्माण करवा रही है जोकि एक से दो सप्ताह में पूर्ण होने की संभावना है। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद शहर में घूमने वाले लावारिस पशुओं को पकड़कर यहां रखा जाएगा। इस गोशाला में पशुओं के लिए चारा-पानी की व्यवस्था भी नगर परिषद द्वारा की जाएगी।
गौरतलब है कि शहरके हर चौराहे, मुख्य मार्ग, बाजार यहां तक की पार्क व बस स्टैंड आदि सार्वजनिक स्थानों पर भी लावारिस पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। इन लावारिस पशुओं की वजह से अक्सर घटनाएं होती रहती हैं। कुछ समय पूर्व एक सांड़ ने शहर में उत्पात मचाते हुए कई लोगों को घायल कर दिया था। वहीं कुछ साल पहले एक सांड़ ने एक महिला को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद प्रशासन व नगर परिषद ने लावारिस पशुओं को पकड़ने की योजना बनाई थी जो पूरी नहीं थी। प्रशासन व नगर परिषद ने कई बार इन लावारिस पशुओं को पकड़ने की योजनाएं बनाई लेकिन हर बार सफल नहीं हुई। इसके वजह से शहर में लावारिस पशुओं की संख्या में लगातार इजाफा होने लगा है।
अब तक नप ने पकड़े 280 लावारिस पशु
जुुलाई में अतिरिक्त मुख्य सचिव ने दो बार वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी उपायुक्तों को अपने-अपने जिलों में लावारिस पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ने के आदेश दिए थे। इस पर जिला उपायुक्त ने शहर की सभी गोशाला प्रतिनिधियों व नगर परिषद अधिकारियों की बैठक बुलाकर शहर में घूमने वाले लावारिस पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में रखने के निर्देश दिए थे।
उपायुक्त के आदेश पर नगर परिषद ने लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए ठेका छोड़ा गया था। जिसमें प्रत्येक पशु को पकड़कर गोशाला छोड़ने पर 450 रुपये की राशी निर्धारित की गई। इसके बाद शहर में घूमने वाले करीब 280 लावारिस पशुओं को पकड़कर गोपाल गोशाला में छोड़ गया। परंतु अभी भी शहर में कई स्थानों पर छुट्टा पशु घूमते हुए दिखाई देते है।
300 से अधिक पशुओं को लेने से गोशाला ने किया इनकार
डीसी के साथ हुई मीटिंग में गोपाल गोशाला प्रतिनिधियों ने 300 से अधिक पशुओं को गोशाला में रखने से मना कर दिया था। इसलिए गोशाला में केवल 280 लावारिस पशुओं को ही भेजा गया है। इसके बाद उपायुक्त ने नगर परिषद को शहर में बचे लावारिस पशुओं को रखने के लिए व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे।
प्रशासन ने कई बार बना चुका है योजनाएं
इन लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए प्रशासन व नगर परिषद अनेक बार योजनाएं बना चुका है। परंतु हर बार योजनाएं किसी न किसी कारण से सिरे नहीं चढ़ पाई। वर्ष 2006 में नगर परिषद पशुबाड़ा बनाने की योजना तैयार की थी। इसके बाद वर्ष 2010 में छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए ठेके भी छोड़े गए। इसके तहत ठेकेदार को प्रति पशु 100 से 200 रुपये तक देने का प्रावधान किया गया था लेकिन गोशालाओं ने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। 2011 में उपायुक्त के आदेश के बाद नगर परिषद ने एक नई योजना बनाकर गायों व सांड़ों को पकड़ने के लिए गोशाला को पैसे देने का प्रावधान किया गया। परंतु यह योजना भी सिरे नहीं चढ़ पाई।
शहर में लावारिस पशुओं को रखने के लिए नगर परिषद खालड़ा की पहाड़ी के नजदीक 4 एकड़ में करीब 40 लाख रुपये लागत से गोशाला का निर्माण करवा रहा है। इस गोशाला का निर्माण कार्य जल्द ही पूर्ण होने की संभावना है। इसके बाद शहर में घूमने वाले सभी लावारिस पशुओं को वहां रखा जाएगा। यहां पशुओं के चारे व पानी की व्यवस्था भी की जाएगी।-
-भारती सैनी चेयरपर्सन, नगर परिषद नारनौल