भले ही अन्ना हजारे के आंदोलन के दबाव में केंद्र सरकार ने राज्यसभा और लोकसभा ने लोकपाल विधेयक पारित कर दिया हो।
लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री और सब मंत्री आ गए हों, मगर हरियाणा का लोकायुक्त कानून लोकपाल जैसा सख्त नहीं बनाया जाएगा।
इस समय लोकायुक्त कानून बिना दांतों का है। लोकायुक्त को न तो स्वयं संज्ञान लेने का और न ही कार्रवाई का अधिकार है। लोकायुक्त सिर्फ सिफारिश कर सकते हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 27 दिसंबर को कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में लोकपाल बिल और राज्यों में लोकायुक्त कानून, खाद्य सुरक्षा योजना को लागू करने बारे जानकारी ली जाएगी।
सोनिया गांधी की बैठक से पहले मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने अफसरों के साथ लोकायुक्त और सुरक्षा योजना पर चर्चा की।
सूत्रों के मुताबिक अफसरों ने सीएम को जानकारी दी कि राज्यसभा और लोकसभा से पारित लोकपाल विधेयक में लोकायुक्त के बारे में राज्यों को 365 दिनों के भीतर कानून बनाने को कहा है।
राज्यों को कोई भी मॉडल नहीं दिया है। हरियाणा में चूंकि पहले से लोकायुक्त कानून बना हुआ है, इसलिए नया कानून बनाने की जरूरत नहीं है।
हरियाणा में लोकायुक्त जस्टिस प्रीतम पाल सिंह कार्यरत हैं और भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों का निपटारा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भी सोनिया गांधी को शायद यही जानकारी दें।
बंसीलाल ने दिया था अधिकार, चौटाला सरकार ने खत्म किया
हरियाणा में लोकायुक्त कानून हविपा-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल ने बनाया था। तब लोकायुक्त कानून मजबूत था और लोकायुक्त को स्वयं संज्ञान लेने का अधिकार था।
मगर ओमप्रकाश चौटाला के मुख्यमंत्री काल में इसे संशोधित कर दिया और स्वयं संज्ञान लेने का अधिकार समाप्त कर दिया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की नौ साल की सरकार में इस कानून में कोई बदलाव नहीं किया गया।
लोकायुक्त ने भी मांग रखा है स्वयं संज्ञान का अधिकार
हरियाणा लोकायुक्त जस्टिस प्रीतम पाल सिंह ने राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया को सौंपी रिपोर्ट में मांग की है कि लोकायुक्त कानून में संशोधन कर स्वयं संज्ञान लेने का अधिकार दिया जाए।
इसके अतिरिक्त लोकायुक्त कार्यालय की तरफ से दस्तावेज आदि मांगने पर न देने वाले को अवमानना माना जाना
हरियाणा के लोकायुक्त कानून में संशोधन होना चाहिए।
मैंने तो विधानसभा में प्राइवेट बिल भी दिया था, मगर वह मंजूर नहीं हुआ था। लोकायुक्त को स्वयं संज्ञान लेने का अधिकार मिलना चाहिए।
-संपत सिंह, पूर्व मंत्री और मौजूदा कांग्रेस विधायक, नलवा।
हरियाणा सरकार लोकसभा और राज्यसभा से पारित लोकपाल विधेयक की स्टडी कर रही है। अगर संशोधन की जरूरत पड़ी तो सरकार कर सकती है।
एसएस ढिल्लों, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव