बीके अस्पताल में गंभीर रूप से पीड़ितों को जीवन रक्षक दवा (लाइफ सेविंग ड्रग्स) के लिए इमरजेंसी, सेंट्रल स्टोर या डिस्पेंसरी के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अस्पताल प्रबंधन ने सभी वार्डों में जीवनरक्षक दवाओं को रखने का निर्णय लिया है। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन ने दवाओं का स्टॉक करने के लिए ट्रॉलियां मंगाई हैं।
सोमवार से बीके अस्पताल के किसी भी वार्ड में भर्ती मरीज को जीवनरक्षक दवाओं के लिए इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सभी जरूरी दवाएं मरीज को वार्ड में ही मिल जाएंगी। अभी तक अस्पताल में भर्ती मरीजों को अतिरिक्त दवा के लिए इमरजेंसी, बीके के सेंट्रल मेडिकल स्टोर या डिस्पेंसरी जाना पड़ता था। तीनाें जगह मरीजों की अधिक संख्या के कारण कई बार दवाएं मिलने में देर हो जाती है। इस कारण मरीज का समय बर्बाद होता है।
दो-दो ट्रालियां प्रत्येक वार्ड में
दवा वितरण के लिए अस्पताल प्रबंधन ने 10 विशेष ट्रॉलियां मंगवाई हैं। इनमें से दो-दो ट्रॉलियाें को प्रत्येक वार्ड में रखा जाएगा। इसके अलावा दो ट्रालियों को निक्कू वार्ड और दो को ऑपरेशन थियेटर में भी रखा जाएगा।
अतिरिक्त कार्यप्रभारी पीएमओ डॉ. विरेंद्र यादव ने बताया कि किसी भी वार्ड में किसी भी समय कोई भी मरीज गंभीर हो सकता है।
ऐसे में डॉक्टर और स्टाफ उसे इमरजेंसी ले जाने को कहते हैं। क्योंकि वहां मुख्य व जीवनरक्षक दवाओं का स्टॉक है। मरीज को वार्ड से इमरजेंसी ले जाने में काफी समय खराब हो जाता है। अगर दवाएं मौके पर ही मौजूद होंगी तो मरीज को बिना देरी के दवा देकर उसकी जान बचाई जा सकती है।