अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दूसरे दिन विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने ब्रह्मसरोवर के घाटों पर सांस्कृतिक छटा बिखेरी। पर्यटक लोक नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियों को देखकर खुद को झूमने से रोक नहीं पाए। पंजाब के कलाकारों ने जहां जिंदवा पेश कर खूब वाहवाही लूटी, वहीं राजस्थान के कलाकारों ने अंगी घेर नृत्य, उत्तराखंड के कलाकारों ने जौनसारी और हिमाचल प्रदेश के कलाकारों ने गद्दी नाटी नृत्य प्रस्तुत किया। शाम साढ़े पांच बजे शंख की ध्वनि के साथ महाआरती हुई, जिसमें इंद्री के विधायक रामकुमार कश्यप ने शिरकत की। धूप खिल जाने पर दूसरे दिन पर्यटकों की संख्या बढ़ी नजर आई। विभिन्न स्टालों पर खूब खरीदारी हुई, जिससे कलाकारों के चेहरे खिल गए।
इस बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के पावन पर्व पर ब्रह्मसरोवर के घाटों पर 15 राज्यों की लोक संस्कृति के अलग-अलग रंग देखने को मिलेंगे। इन 15 राज्यों के करीब 400 कलाकार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव पर 19 दिसंबर तक लोगों को लोक कला के साथ जोड़ने का प्रयास करेंगे। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केंद्र (एनजेडसीसी) की तरफ से 5 राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, पंजाब और राजस्थान के 125 कलाकार महोत्सव में पहुंच चुके हैं। ये कलाकार 19 दिसंबर तक अपनी लोक संस्कृति की छटा बिखेरेंगे। इतना ही नहीं 11 और राज्यों उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, असम, गुजरात,सिक्किम, झारखंड, मणिपुर, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान के और कलाकार 8 दिसंबर को कुरुक्षेत्र पहुंच जाएंगे। इन 11 राज्यों से 165 कलाकार आएंगे। इस प्रकार कुल 15 राज्यों से करीब 400 कलाकार अपने-अपने प्रदेश की लोक संस्कृति का प्रदर्शन करेेंगे। कलाकारों का कहना है कोरोना काल में बेशक वह अपने घरों में कैद हो गए थे फिर भी उन्होंने अपनी कला को फिर भी जिंदा रखा। कलाकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव एक ऐसा जरिया है, जहां पर वह अपनी कला का बखूबी मंचन करते हैं। यही एक प्लेटफार्म है जिस तरह से भगवान श्रीकृष्ण ने भी युद्ध के जरिए ही अपना संदेश विश्व भर में पहुंचाया था। पंजाब के कलाकारों ने जब अपनी प्रस्तुति दी और कहा कि जिंदवा पंजाब का विश्व भर में जाना पहचाना नृत्य है और इसको देखने के लिए लोग बड़े ही चाव से आते हैं।
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बाल देखरेख केंद्रों के बच्चों ने लगाई कलाकृतियों की लगाई स्टॉल
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से महोत्सव में प्रदेश के सभी बाल देखरेख केंद्रों के बच्चों द्वारा बनाई गई विभिन्न प्रकार की कलाकृतियों का स्टॉल लगाया गया है। बच्चों की बनाई हुई कलाकृतियों को देखकर पर्यटक बहुत उत्साहित हैं। प्रदेश के सभी जिला बाल संरक्षण इकाई के माध्यम से इन बच्चों को प्रशिक्षित कर इनसे विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां बनवाई गई हैं। इस प्रदर्शनी में बच्चों द्वारा बनाई गई जो भी वस्तुएं सेल होंगी, उस राशि को बच्चों के खाते में डाल दिया जाएगा।