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अनदेखी की भेंट चढ़ी सांझी साइकिल योजना, 100 में से 30 साइकिल बाल भवन में धूल फांक रही, 70 कहां कुछ पता नहीं

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लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को स्वच्छ रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन की ओर से चार साल पहले शुरू की गई साझी साइकिल को किसी का साथ नहीं मिला, नतीजा, योजना अनदेखी की भेंट चढ़ गई। 100 में से 30 साइकिलें अब बाल भवन परिसर में धूल फांक रही हैं, वहीं 70 साइकिलें कहां गईं इस बारे में किसी को कुछ पता नहीं। योजना पर लाखों रुपये खर्च कर जिले में 13 जगह प्वाइंट बनाए गए थे, जहां पर इन साझी साइकिलों को खड़ा किया गया था। प्रशासन की अनदेखी इतनी भारी पड़ी की आज वहां से साइकिल तो क्या लोहे के स्टैंड भी गायब हो चुके हैं। बची हुई कुछ साइकिलें बाल भवन में धूल फांक रही हैं उनमें से कई पंक्चर हो चुकी हैं, कुछ के ब्रेक टूट गए, किसी का रिम टेढ़ा हो गया या अन्य पार्ट टूट चुके हैं।
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वर्ष 2017 को तत्कालीन उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने स्वर्ण जयंती पर इस प्रोजेक्ट को शुरू कराया था। जिस पर 17 जून, 2017 को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड कार्यालय से मंत्रो उच्चारण के साथ योजना का शुभारंभ किया गया। पहले दिन ब्रह्मसरोवर के आसपास तीन जगह साझी साइकिल के लिए प्वाइंट बनाए गए थे। शुभारंभ पर विधायक सुभाष सुधा, तत्कालीन उपायुक्त सुमेधा कटारिया, केडीबी मानद सचिव, एडीसी, एसडीएम व केडीबी सीईओ ने भी खूब साइकिल चलाई। बाद में धीरे-धीरे जिले में 13 जगह इन साइकिल के प्वाइंट बनाए गए। योजना को शुरुआत में अच्छी प्रतिक्रिया मिली, लेकिन धीरे-धीरे बढ़ती अनदेखी भारी पड़ गई।
अमर उजाला की टीम ने सोमवार को योजना की पड़ताल के लिए सभी प्वाइंट पर जाकर देखा। सत्कार भोजनालय के सामने सिर्फ बोर्ड लगा हुआ है और एक लोहे का स्टैंड पड़ा हुआ है, जबकि एक स्टैंड भोजनालय के अंदर पड़ा है। केडीबी कार्यालय के सामने न तो साइकिल मिली और न ही स्टैंड। आसपास के दुकानदारों से पूछा तो वे बोले कुछ पता नहीं कहां गईं साइकिलें। इसी प्रकार लघु सचिवालय परिसर में जाकर देखा तो वहां भी कोई साइकिल नहीं मिलीं। ऐसे ही हालात पिहोवा में एसडीएम कार्यालय परिसर में बने प्वाइंट पर नजर आए। बाद में पता चला कि कुछ साइकिल बाल भवन में खड़ी हैं। मौके पर पहुंचे तो बाल भवन के स्कूल के बरामदे में करीब 30 साइकिलें धूल फांक रही थीं, लेकिन बची 70 साइकिलें कहां हैं इसका अभी भी कुछ पता नहीं चल पाया। संवाद
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साझी साइकिल योजना को शुरू करने के पीछे जिला प्रशासन का मकसद लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक करना था। इस योजना के तहत लोगों में साइकिल चलाने के लिए रुचि पैदा करना था, ताकि लोग निजी वाहनों की उपयोग कम करें। इस योजना के साथ जुड़ने पर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को स्वास्थ्य लाभ भी मिलता।
साझी साइकिलों को खड़ा करने के लिए पिपली में गीता द्वार, लघु सचिवालय, नया बस अड्डा, सन्निहित सरोवर और दो प्वाइंट ब्रह्मसरोवर पर भी दिए गए थे, ताकि सुबह-शाम की सैर के लिए आने वाले लोग और पर्यटक इसका लाभ उठा सकें। इसके साथ ही सेक्टर वासियों के लिए सेक्टर-8 के जिमखाना क्लब में भी एक प्वाइंट बनाया गया था। इसी तरह लाडवा में तीन, पिहोवा में दो और शाहाबाद में भी सांझी साइकिल योजना के प्वाइंट बनाए गए थे। आज इन सभी प्वाइंट पर एक भी साइकिल नहीं है।
इन साइकिलों के लिए 100 रुपये में कार्ड बनता था और इसके लिए प्रतिदिन पांच रुपये किराया वसूला जाता है। योजना के शुरुआती दिनों में लोगों ने इसके लिए रुचि दिखाई थी और 200 लोगों ने अपने कार्ड बनवाए थे। इनमें भी ज्यादातर कुरुक्षेत्र में ही बन पाए थे, लाडवा और पिहोवा में तो नाम मात्र के ही कार्ड बने थे। अधिकारियों की अनदेखी के चलते यह योजना पूरी तरह ही दम तोड़ गई है।
जिला बाल कल्याण परिषद अधिकारी सरबजीत सिंह ने कहा कि वर्ष 2017 में सामाजिक संगठनों के सहयोग से बाल कल्याण परिषद ने ही इन साइकिल को उपलब्ध कराया था। जब योजना ढीली पड़ी तो प्रशासन द्वारा कुछ साइकिल को बाल भवन में रखवा दिया गया। अब प्रशासन के जैसे आदेश आएंगे उस हिसाब से साइकिल को रिपेयर कराया जाएगा या नीलामी कराई जाएगी।
अतिरिक्त उपायुक्त अखिल पिलानी ने कहा कि योजना अच्छी थी। इस मामले में वे अधिकारियों से बातचीत करेंगे। बाकी साइकिल कहां हैं इस बारे में पता लगाया जाएगा। कोशिश रहेगी कि योजना को जल्द से जल्द दोबारा शुरू किया जा सके।
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