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गुरुकुल में उपनयन संस्कार और पर्यावरण एवं भू-संपदा संरक्षण पर संगोष्ठी का आयोजन

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गुरुकुल कुरुक्षेत्र में उपनयन संस्कार और पर्यावरण एवं भू-संपदा संरक्षण पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी से पूर्व गुरुकुल कुरुक्षेत्र में नवप्रविष्ठ छात्रों का विधि विधान के अनुसार उपनयन संस्कार कराया गया। वहीं छात्रों को पर्यावरण एवं भू-संपदा संरक्षण की शपथ दिलाई गई। संगोष्ठी मेें गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शिरकत की। उन्होंने उदाहरण के माध्यम से गुरुकुल शिक्षा पद्धति व आधुनिक शिक्षा पद्धति का अंतर समझाया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा पद्धति केवल मात्र नौकरी, आजीविका का साधन बनकर रह गई हैं वहीं गुरुकुल शिक्षा पद्धति जीवन निर्माण का आधार है। आचार्य देवव्रत ने कहा कि उपनयन का अर्थ है-गुरु शिष्य का परस्पर नजदीक आना, अर्थात उपनयन संस्कार के उपरांत गुरु ब्रह्मचारी का धर्म का पिता और ब्रह्मचारी गुरु का धर्म का पुत्र बन जाता है। गुरु अपने शिष्य को संस्कार और अक्षर का ज्ञान देता है जो मानवता के कल्याण का आधार बनता है। आचार्य देवव्रत ने छात्रों को पर्यावरण एवं भू-संपदा संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपने-अपने जन्मदिवस, विवाह की वर्षगांठ व अन्य शुभ अवसर पर एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए। केवल मात्र पौधा लगाने तक ही सीमित नहीं रहना बल्कि उनकी देखभाल भी करनी है।
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इस मौके पर मुख्य संरक्षक संजीव आर्य, गुरुकुल प्रधान कुलवंत सैनी, निदेशक एवं प्राचार्य कर्नल अरुण दत्ता, डॉ. राजेंद्र विद्यालंकार, सह प्राचार्य शमशेर सिंह, कर्नल बीजी रॉय, सहित स्टाफ व छात्र मौजूद रहे।
गुरुकुल में ब्रह्मचारियों के लिए राखी की भी व्यवस्था की गई। जिन बच्चों के घर से राखी नहीं आ सकी उन्हें गुरुजनों ने राखी बांधकर रक्षाबंधन का पर्व मनाया। गुरुजनों से राखी बंधवाकर बच्चों ने उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया।
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