संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। ओमिक्रॉन वैरिएंट के रूप में आई कोरोना की तीसरी लहर लगभग खत्म हो चुकी है। अब इक्का-दुक्का ही कोरोना संक्रमित मरीज सामने आ रहा है। प्रदेश सरकार ने भी कोविड काल में लगाई सभी पाबंदियां हटा दी है। ओमिक्रॉन के खतरे को भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस पर लगाए गए रोडवेज के 35 चालक अभी तक नहीं लौटे है। इससे कई रूटों पर बस सेवा प्रभावित हो रही हैं।
इससे यात्रियों को भी अपने गंतव्य तक पहुंचने जद्दोजहद करनी पड़ रही है। पर्याप्त चालक न होने के कारण कई मार्ग पर बसों के फेरे रद्द करने पड़ रहे हैं। बस चालक की छुट्टी होने पर दूसरे चालक की व्यवस्था करने में विभाग के अधिकारियों को भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं चालक जरूरत के समय छुट्टी नहीं ले पा रहे हैं।
रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार ओमिक्रॉन की दस्तक के बाद कुरुक्षेत्र डिपो से 35 बस चालकों को जनवरी में एंबुलेंस चलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग में भेजा गया था। इन चालकों में से 22 चालकों की ड्यूटी स्वास्थ्य विभाग कुरुक्षेत्र और 12 चालकों को अंबाला स्वास्थ्य विभाग में ड्यूटी पर भेजा गया था, जबकि एक चालक प्रशिक्षण पर चल रहा है। इन चालकों की बसों पर वापस ड्यूटी लगाने के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठा रही, बल्कि अब उन्हें 31 मई तक एंबुलेंस पर सेवाएं देने के आदेश दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि कुरुक्षेत्र डिपो और पिहोवा सब डिपो की कुल 143 बसों पर महज 271 बस चालक हैं, जबकि एक बस पर दो दिन में तीन चालक की आवश्यकता है। इनमें से भी वरिष्ठ बस चालकों को स्वास्थ्य संबंधित परेशानी सहित अन्य कारणों से विभाग में इधर-उधर ड्यूटी पर लगाए गए है।
31 मई तक एंबुलेंस पर तैनात रहेंगे रोडवेज के चालक : अशोक
रोडवेज महाप्रबंधक अशोक मुंजाल का कहना है कि सरकार के आदेशानुसार विभाग से 35 बस चालकों को एंबुलेंस चलाने के लिए भेजा था। अब सरकार की ओर से आदेश प्राप्त हुए हैं कि बस चालक आगामी 31 मई तक एंबुलेंस पर ही सेवाएं देंगे। बस चालकों की कमी के चलते कुछ मार्गों पर बस सेवा प्रभावित हुई हैं। हालांकि हर मार्ग पर बेहतर व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है।