फोन पर आयुष ने बताया कि रूसी हमले के बाद कीव एयरपोर्ट खाली हो गया और खारकीव को भी बंद किया गया है। यूक्रेन में स्कूल, कॉलेज और विवि आगामी आदेश तक बंद रहेंगे। लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जा रही है।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र के ज्योति नगर के जुल्का परिवार का इकलौता बेटा आयुष-22 भी यूक्रेन के खारकीव में फंसा हुआ है। खारकीव यूक्रेन की राजधानी कीव से सड़क के रास्ते महज छह घंटे की दूरी पर है। दोपहर सवा तीन बजे व्हाट्सएप के जरिए वीडियो कॉल पर बात करते हुए आयुष जुल्का ने बताया कि यूक्रेन के हालात बेहद खराब हो गए हैं।
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उसकी 28 फरवरी की टिकट बुक हो गई है मगर रूसी हमले के बाद राजधानी कीव के एयरपोर्ट को खाली करा दिया गया है। साथ ही खारकीव का एयरपोर्ट भी बंद कर दिया गया है। ऐसे में उनकी वापसी पर संशय बरकरार है।
उन्होंने बताया कि राजधानी कीव में उनके कई दोस्त हैं। सुबह के समय उनसे सूचना मिली थी कि कीव में गोलाबारी शुरू हो गई है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है। वहीं खारकीव में सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय आगामी आदेश तक बंद कर दिए गए हैं। ऐसे में खारकीव में ब्लैकआउट होने का खतरा भी सता रहा है। प्रशासन की ओर से रात के समय अपने घरों से बाहर न निकलने और ग्रुप में रहने की एडवाइजरी जारी की गई है। सभी लोग अपने खाने-पीने, दवा और अन्य सामान एकत्रित कर रहे हैं।
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स्थानीय प्रशासन की ओर से शेल्टर होम बनाए गए हैं, मगर भारतीय दूतावास और सरकार की ओर से उनको कोई सहायता नहीं मिल रही है। आरोप लगाया कि भारतीय दूतावास द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर सुबह से बंद पड़े हैं। कॉल मिलने के बाद भी कोई उसे रिसीव नहीं कर रहा है। यूक्रेन में फंसे सभी भारतीय बेहद ही डरे और सहमे हुए हैं और लगातार सरकार व परिजनों से उनको यहां से निकालने की अपील कर रहे हैं।
एक लाख में मिली फ्लाइट की टिकट
आयुष ने बताया कि उसके साथ पंजाब के युवक भी हैं। सभी घर जाने के लिए एयर टिकट बुक कर रहे हैं। उसकी 28 फरवरी की टिकट बुक हो गई है मगर संकट को देखते हुए टिकट काफी महंगी हो गई है। उसकी टिकट एक लाख रुपये में बुक हुई है। पहले 60 हजार रुपये में आने-जाने की टिकट बुक हो जाती थी।
आयुष के चाचा संजीव जुल्का ने बताया कि आयुष चार साल पहले एमबीबीएस करने के लिए यूक्रेन गया था। दो महीने पहले आयुष घर भी आया था। यूक्रेन में रूसी सेना के हमले के बाद से घर के सभी सदस्य बेहद परेशान हैं। घर के सभी लोग बार-बार उसे कॉल करके हौसला दे रहे हैं। सरकार व प्रशासन से मांग है कि सभी भारतीय नागरिकों को निकालने के तुरंत इंतजाम किए जाएं।