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‘दो चार पलों में ही एक उम्र बितानी है’

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जय भगवान सिंगला को पौधा भेंट करते सेवानिवृत आईजी हरीश रंगा व अन्य। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। प्रेरणा वृद्धाश्रम में सांस्कृतिक संस्था एसआरपी मंच पानीपत की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। तीन घंटे तक चले इस कार्यक्रम में कवियों ने भारतीयता और राष्ट्रीयता से ओतप्रोत अपनी कविताओं के माध्यम से बुजुर्गों संग अपनी भावनाओं को साझा किया। इससे पहले मेहमानों ने प्रेरणा वृद्धाश्रम का अवलोकन किया और मंदिर में मां के दर्शन करके शहीद स्मारक पर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम की शुरुआत हरीश रंगा की प्रस्तुति से हुई। युवा शायर प्रकाश ने कहा उम्मीद में था फूल कि पत्थर मिला मुझे, एक तेजधार पीठ पर खंजर मिला मुझे। डॉ. बलवान ने अपनी प्रस्तुति में कहा कि पुरवाई के झोंकों से फिर उस बिरहन का मन डोला, बूढ़ी बदली ऐसा बरसी, बादल भी हैरान हुए, अपनी प्यास बुझाने के लिए पपीहे ने था मुख खोला। सूबे सिंह सुजान ने कहा कि उसने कहा कि फूलों, बहारों को देखना, फिर पेड़ और नदी के किनारों को देखना, मैंने कहा कि फूल, कभी आते तो करीब, हम सीख जाते, खूब नजारों को देखना।
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जय भगवान सिंगला ने अपनी हास्य प्रस्तुति में कोरोना के समय में मास्क लगाने से हुए महिलाओं के नुकसान और शादी ब्याह के नुकसान फायदों को व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि दब्बू पति सबसे सुखी, नित पिटने से बच जाए, ऐसे भी देखे बहुत, सिर पर बाल ना पाए। युवा कवि वीरेंद्र राठौर ने कहा कि जो जोड़े जीवन को जीवन से, वह जीवन जीवन हो जाएगा, जो आंसू नयनों की पीड़ा को, पी लेगा पावन हो जाएगा। इस्माईलाबाद से पहुंची दिव्या कोचर ने कहा कि दो चार पलो में ही एक उम्र बितानी है, चुपके से तेरी मैंने एक शाम चुरानी है, तहजीब की चूनर है ओढू तो दमकती हूं, मेरे पास बुजुर्गों की ये एक निशानी है।
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कवि सुधीर ढांडा ने मां को याद करते हुए कहा कि मां डांटे तेरी सुन सुनकर हुआ हूं मैं जवान, मां-बाप की छाया मैं चलता था सीना तान, आपके के ही दम से, है मेरी पहचान यहां, फिर जाने किस जन्म में तू मिलेगी मेरी मां। आश्रम में ही आश्रय लिए हुए माता सुधा गुप्ता ने आराध्य देव श्री कृष्ण जी पर छंद पढ़कर सब का मन मोहा। एक अन्य बुजुर्ग ने अपनी प्रेरक शायरी के माध्यम से कहा कि दिल के कुछ अरमान थे, एक तरफ थी झाड़ियां एक तरफ श्मशान थे, चलते चलते एक हड्डी पैर में चुभी, उस हड्डी के ये बयान थे, ए चलने वाले संभल कर चल, हम भी कभी इंसान थे। इस अवसर पर जय भगवान सिंगला, सेवानिवृत्त आईजी हरीश रंगा, अनीता रामपाल, वीरेंद्र राठौर, डॉ. बलवान आदि मौजूद रहे।
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