सीजन में अनाज मंडियां अट जाने पर अब तक सड़कों पर तो धान गिराया जा रहा था, लेकिन अब रिहायशी एरिया भी मंडी में तब्दील हो गए हैं। ये हालात सेक्टर 3,4 व 5 के हैं, जहां की मुख्य सड़कों को धान गिराकर ब्लॉक कर दिया गया है। तीनों सेक्टरों की मुख्य सड़क पर दूर तक धान की ढेरियां लगा दी गई हैं और यहीं पर मशीनें लगाकर इस धान को साफ किया जा रहा है। धान की उड़ती डस्ट सेक्टर वासियों को कई प्रकार के रोग दे रही है। इस मामले में मार्केट कमेटी का कहना है उन्होंने सेक्टरों में कोई भी खरीद केंद्र स्थापित नहीं किया। जब यहां कोई खरीद केंद्र ही नहीं बनाया गया तो सेक्टरों में किलोमीटर तक धान गिराकर उसकी सफाई, तुलाई और भराई कैसे की जा रही है। इस बारे खरीद एजेंसी द्वारा भी कोई स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। वहीं एडीसी का कहना है कि इस बारे उन्हें जानकारी नहीं थी। वें अधिकारियों से बातचीत करेंगे।
सेक्टरों में ऐसे हालात पहली बार बने हैं, जिंदल चौक दोनों ओर से धान से अट गया है। चौक से सेक्टर तीन की ओर जाने वाली बाईं ओर की सड़क को धान डालकर ब्लॉक कर दिया गया है, वहीं सेक्टर चार और पांच की ओर जाने वाली दाईं ओर की सड़क भी पूरी तरह धान से अटी है। इतना ही नहीं सेक्टर पांच के शमशान घाट का रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया है। हालात ऐसे हैं कि सेक्टर वासी अब सुबह शाम की सैर भी नहीं कर पा रहे हैं। इतना ही नहीं धान लेकर पहुंच रहे ट्रैक्टर ट्रालियां डिवाइडर पर लगे पेड़ पौधों को टायरों तले रौंद कर नष्ट किया जा रहा है।
सेक्टर चार में सैलून संचालक रमेश कुमार का कहना है कि पिछले दस दिनों से दुकान के बाहर धान से रास्ता अटा हुआ है। सिर्फ पैदल व्यक्ति ही यहां से गुजर सकता है। दुकान के सामने लगी धान की ढेरी को देखकर ग्राहक वापिस चले जाते हैं।
देवीदास पुरा वासी संजय का कहना है कि मंडी की बजाय घरों के बाहर सड़कों पर धान डालना बिल्कुल गलत है। इसकी वजह से उन्हें पूरा दिन गेट बंद करके रहना पड़ रहा है। घर से बाहर निकलते ही धान की सफाई से निकलती डस्ट उड़कर सीधे चेहरे पर पड़ती है जिस वजह से एलर्जी होने का खतरा बना रहता है।
सेक्टर 4 वासी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर रोमा सिंह ने बताया कि वह यहां फ्लैट में रहती हैं। डस्ट से उन्हें अस्थमा की दिक्कत हो जाती है और इन दिनों उन्हें इसी डस्ट के बीच दिनरात रहना पड़ रहा है। रिहायशी एरिया में इस प्रकार धान गिराने की वें सीएम को ट्वीट कर शिकायत करेंगी।
पिपली मार्केट कमेटी सचिव राहुल मियो ने कहा कि कमेटी की ओर से सेक्टरों में कोई खरीद केंद्र नहीं बनाया गया है। यह धान किसानों द्वारा खुद ही गिराया जा रहा है। वहीं मंडी में धान का सीजन सुचारू रूप से चल रहा है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हेल्थ सेंटर के फिजिशियन डॉ. आशीष अनेजा ने बताया कि धान से उड़ने वाली डस्ट के कारण आंखों में एलर्जी, दमा, चर्म रोग, जुकाम, छाती में भारीपन, खांसी की वजह से बलगम व लंबे समय तक संपर्क में रहने से नजला हो सकता है। इस प्रकार के वातावरण में बहुत ही एहतियात बरतने की जरूरत हैं।
एडीसी अखिल पिलानी ने कहा कि रिहायशी एरिया में धान गिराए जाने का मामला उनके संज्ञान में नहीं था। वे इस बारे अधिकारियों से अभी बातचीत करते हैं। इस एरिया से सारा धान उठवाया जाएगा।