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भारत मां तेरे वीरों ने दुश्मन चुन-चुन कर मारे हैं...

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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में नाटक रेजांगला का मंचन करते कलाकार। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। न झुकने दिया तिरंगे को, न युद्ध कभी ये हारे हैं... भारत मां तेरे वीरों ने दुश्मन चुन-चुनकर मारे हैं। शेरों के पुत्र शेर ही जाने जाते हैं.. लाखों के बीच फौजी पहचाने जाते हैं.. यह संवाद किसी फिल्म के नहीं बल्कि भारत-चीन युद्ध में मेजर शैतान सिंह की बटालियन के वीर सैनिकों के हैं ,जिन्होंने रेजांगला चोटी को बचाकर अपनी शहादत दी।
रवि मोहन द्वारा निर्देशित नाटक रेजांगला कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय नाट्य उत्सव में दूसरे दिन ऑडिटोरियम के मंच पर प्रस्तुत किया गया। वास्तव में यह नाटक ‘रेजांगला’ 18 नवंबर 1962 के उस आखिरी दिन की शौर्य गाथा पर आधारित है। इस नाटक में 13 कुमाऊं की चार्ली कंपनी के जवानों ने अपने मन में उठी मानवीय व्यथा को अपनी भावनाओं से व्यक्त किया गया। मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर शैतान सिंह की अगुवाई में वे सभी जवान वीरता की ऐसी कहानी रच गए थे जिसे देश आज भी गर्व से याद करता है।
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इस नाटक में एक सैनिक के कोमल मानवीय हृदय के अंदर बसी अनुपम भावनाओं के माध्यम से इस बात को भी दर्शाने की कोशिश की गयी है कि जब एक सैनिक युद्ध में दुश्मन देश के किसी सैनिक को मारता है तब भी तो एक इंसान ही मरता है और जब स्वयं देश की रक्षा के लिए शहीद होता है तब भी एक इंसान ही मरता है। नाटक में सैनिक अपनी आरजु जाहिर करते हुए कहते हैं.. जन्मभूमि हिंदुस्तान हो, मिटना चाहूं तो बस तिरंगा ही मेरा जहान हो।
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कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा ने मुख्यातिथि के रूप में छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह उत्सव देश के शहीदों को समर्पित है। इस तरह के नाटक युवाओं में राष्ट्रीय भावना का संचार करते हैं। युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. महासिंह पूनिया ने कहा कि विश्वविद्यालय का नाट्य उत्सव समारोह छात्र-छात्राओं में नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप लोक सांस्कृतिक संस्कारों का संचार कर रहा है। इस अवसर पर नाटक के निर्देशक रवि मोहन सहित सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रो. शुचिस्मिता, प्रो. सुनील ढीगड़ा, प्रो. परमेश, डॉ. ब्रजेश साहनी, डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. संजय शर्मा, डॉ. रमेश ढांडा, डॉ. सुमन ढांडा, अशोक चौधरी, डॉ. रामनिवास आदि उपस्थित रहे।

नाटक रेजांगला के मंचन के दौरान अभिनय करते कलाकार। संवाद- फोटो : Kurukshetra

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