हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के पूर्व प्रधान एवं वर्तमान में कमेटी के सदस्य बलजीत सिंह दादूवाल तथा दीदार सिंह नलवी व कमेटी के वर्तमान पदाधिकारी आमने-सामने आ गए हैं। दादूवाल और नलवी ने जहां एक दिन पहले ही कमेटी पदाधिकारियों पर वैसाखी पर्व और होला महल्ला न मनाने से लेकर कई गंभीर आरोप लगाए, वहीं अगले ही दिन रविवार को हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रधान और अन्य पदाधिकारी भी मैदान में उतर आए।
कमेटी ने सिख मिशनरी में प्रधान महंत करमजीत सिंह की अध्यक्षता में अहम बैठक की, जिसमें पूरे मामले पर करीब ढाई घंटे गहन चर्चा की गई। इसके बाद में पत्रकारों के समक्ष बलजीत सिंह दादूवाल और दीदार सिंह नलवी पर षडयंत्र रचने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वे प्रधान न बनने की टीस निकाल रहे हैं और उन्हें कमेटी का 109 करोड़ का बजट खटक रहा है, लेकिन उन्हें अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
महंत करमजीत सिंह ने कहा कि कुछ सदस्यों ने कमेटी को बदनाम करने के लिए वैसाखी के दिन नाडा साहब गुरुद्वारे में राशन खत्म हो जाने और कमेटी द्वारा राशन लेने पर रोक लगाने के आरोप लगाते हुए अफवाह फैलाई। वे उसी दिन अन्य सदस्यों को लेकर पहुंचे तो स्टोर में पांच माह से ज्यादा का राशन था। लंगर चल रहा था तो हजारों संगत आई हुई थी।
वहां मैनेजर से बातचीत की तो उन्होंने माना कि उसे भड़काया गया था। रिकार्ड जांचा तो वहां कमेटी सदस्य रमणीक मान के नाम से भी कोटेशन मिली। मैनेजर को धमकी तक दी गई थी। डर के चलते उन्होंने अपने लिखे पत्र में उनका नाम तक नहीं लिखा। महंत ने कहा कि दादूवाल और नलवी के पास अब कोई काम नहीं है और वे झूठे आरोप लगाने में लगे हैं। मामले में कमेटी की ओर से पत्र भेजकर स्पष्टीकरण लिया जाएगा।
संगत से लिफाफे लेकर जेब भरते रहे दादूवाल : धमीजा
कमेटी के महासचिव गुरविंद्र सिंह धमीजा ने पत्रकारवार्ता में दादूवाल और नलवी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का जवाब दिया। फिर आरोपों से भरा पत्र फाड़ दिया। कहा कि ये दोनों पहले कमेटी के प्रधान रह चुके हैं, खुद बताएं कि उन्होंने कितनी बार उक्त दोनों कार्यक्रम मनाए। वर्तमान हरियाणा कमेटी ने सात अप्रैल को लाखनमाजरा तो आठ को यमुनानगर में होला महल्ला मनाया।
यमुनानगर में नलवी ने ही मुख्यमंत्री को सिरोपा डाला था। इसके बावजूद वे अनाप-शनाप बयान देकर आरोप लगा रहे हैं। धमीजा ने कहा कि दादूवाल संगत से लिफाफे लेकर जेब भरते हैं और खुद को संत व ईमानदार होने का दावा करते हैं। वे हाल ही में बनी हरियाणा कमेटी से हिसाब मांग रहे हैं जबकि आज तक एसजीपीसी से कभी हिसाब नहीं मांगा।
गुरविंद्र धमीजा ने तंज कसते हुए कहा कि जब कमेटी बनी थी तो उस दिन दादूवाल खुद प्रधान बनने की मंशा से मिठाई लेकर पहुंचे थे, लेकिन जब नहीं बनाया गया तो वह विरोध में आ गये। लेकिन उसके साथ बैठक से एक भी सदस्य नहीं गया था। बाद में उन्होंने माफी मांगी थी और साथ काम करने की बात की थी, लेकिन अब फिर उसी राह पर है।