पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे कर्मचारियों का गुस्सा रविवार को फूट पड़ा। कुरुक्षेत्र और नारनौल में हजारों कर्मचारी सड़कों पर उतर आए और विशाल रोष मार्च निकाला।
कुरुक्षेत्र में पेंशन बहाली संघर्ष समिति के बैनर तले कर्मचारी सुबह करीब नौ बजे पुराना बस अड्डे पर एकत्रित होना शुरू हो गए थे, जहां से वे रोष मार्च निकालते हुए जिला सचिवालय पहुंचे। कर्मचारी हाथों में बैनर, कटआउट आदि लिए हुए थे तो सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। जिला सचिवालय में भी कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी की और करीब एक घंटे से धरना दिए हुए हैं। यहां रोष मार्च के बाद जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा जाएगा। आंदोलन कर रहे कर्मचारियों में लगभग सभी सरकारी विभागों के साथ-साथ कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने भी भागेदारी की है। प्रधान डॉ आनंद के नेतृत्व में पदाधिकारी व अन्य शिक्षक पुराने बस अड्डे पर ही कर्मचारियों को समर्थन देने पहुंचे।
पुरानी पेंशन बहाली संर्घष समिति के प्रवक्त अमरजीत पांचाल ने बताया कि इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी भी शामिल है। पहले 19 फरवरी को मुख्यमंत्री आवास का घेराव भी किया गया था। उस समय भी बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी शामिल हुई थी। अब कर्मचारियों ने यह मांग पूरी कराने की ठान ली है और इसके लिए कोई भी बड़ा आंदोलन करने से कर्मचारी पीछे नहीं हटेंगे।
नारनौल में निकाला आक्रोश मार्च
नारनौल में पेंशन बहाली संघर्ष समिति द्वारा आक्रोश मार्च निकाला गया। जिला प्रधान सुरेन्द्र यादव की अध्यक्षता में जिले के हजारों कर्मचारी/अधिकारी पेंशन आक्रोश मार्च में शामिल हुए।
संघर्ष समिति ने सरकार को स्प्ष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रदेश में जल्द पुरानी पेंशन बहाल न की गई तो संघर्ष समिति विरोध प्रदर्शनों के साथ साथ आगामी चुनावों में गठबंधन सरकार को सत्ता से भी बाहर करने का काम करेगी। हिमाचल प्रदेश का स्पष्ट उदाहरण गठबंधन सरकार के सामने है। संघर्ष समिति के जिला प्रधान सुरेन्द्र यादव ने कहा कि 20 फरवरी को हरियाणा सरकार और 6 अप्रैल को केंद्र सरकार द्वारा एनपीएस की समीक्षा कमेटी केवल मुद्दे को लम्बा खींचने और गुमराह करने का जरिया मात्र है। सरकार अगर पुरानी पेंशन योजना के मुद्दे पर गंभीर है तो इच्छाशक्ति दिखाते हुए राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और हिमाचार प्रदेश की तर्ज पर पुरानी पेंशन नीति को बहाल करे।
हम पहले भी कई बार सरकार को स्पष्ट कर चुके है कि कर्मचारी कोई बीच का रास्ता या एनपीएस में बदलाव नही बल्कि पूर्ण रूप से पुरानी पेंशन नीति की बहाली चाहता है और किसी बदलाव से मानने वाला नहीं है। सरकार जहां एक तरफ कमिटी बना रही है वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री और मंत्री पुरानी पेंशन पर तथ्यहीन बयानबाजी कर मुद्दे को गुमराह करने की कोशिश कर रहे है। इसको लेकर कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। जब तक प्रदेश में ओपीएस बहाल नही हो जाती तब तक पेंशन बहाली संघर्ष समिति का पेंशन आंदोलन जारी रहेगा।
इसी कड़ी में 1 जून 2023 से भीषण गर्मी के बीच संघर्ष समिति प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल और प्रदेश महासचिव ऋषि नैन के नेतृत्व में नांगल चौधरी से ओपीएस संकल्प यात्रा निकलेगी। यात्रा सभी जिलों में कर्मचारियों/अधिकारियों के साथ–साथ आम जनता को भी ओपीएस आंदोलन के लिए जागरूक करते हुए 22 जून को चंडीगढ़ में राज्यपाल को अपना ज्ञापन सौंपेगी। यात्रा में सभी विभागों के कर्मचारी - अधिकारी बड़ी संख्या में शामिल होंगे। अगर इसके बावजूद भी सरकार पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने के लिए कोई सकारात्मक कदम नही उठाती तो संघर्ष समिति प्रदेश में ओर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तय करेगी। राज्य महासचिव ऋषि नैन ने कहा की आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनावों में वोट फॉर ओपीएस मुहिम चला गठबंधन सरकार को सत्ता से बाहर करने का काम करेगी।
आज प्रदेश का सभी विभागों का कर्मचारी/अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर संगठित है और हमारा स्पष्ट नारा है पेंशन नही तो वोट नही, जो ओपीएस बहाल करेगा वही देश पर राज करेगा। आगामी चुनावों में ओपीएस बहाली सबसे बड़ा मुद्दा होगा। पेंशन आक्रोश मार्च में जिला महासचिव अशोक यादव, जिला संरक्षक राजेश वर्मा, जेई यूनियन जिला प्रधान नितिन यादव, ब्लॉक नारनौल प्रधान हिम्मत सिंह, जितेंद्र डांगी नांगल चौधरी, सुनील कुमार अटेली, रमेश शर्मा कनीना, विक्रम सिंह महेंद्रगढ़,रमेश यादव प्रधान पीडब्ल्यूडी वर्कर्स यूनियन, पब्लिक हेल्थ प्रधान श्रीकिशन, दीपक शांदिल कृष्ण कुमार नंगली प्रधान प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन, विजय, संगीत, हरी सिंह रोडवेज, हंसराज, सुनील जांगड़ा पंचायती राज, बीर सिंह हसला प्रधान, रविंदर डबास जे ई, देवेंद्र लांबा, पंकज जांगड़ा, रमेश सोनी, सुभाष सोनी प्रधान शारीरिक शिक्षा, रामकिशन लांबा, रघुबीर सिंह पटेल, सिकंदर, संजय योगी, योगेश यादव, योगेंद्र, हंसराज, अमरजीत, सोमवीर सिवाच, अशोक कुमार, हवा सिंह, संतोष, गुरदयाल आईटीआई, आदि हजारों की संख्या में कर्मचारी और अधिकारी शामिल रहे।