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लेबर रूम दो दिन के लिए बंद, महिलाएं करनाल रेफर

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जिला अस्पताल में फैली गंदगी के कारण लेबर रूम को संक्रमण मुक्त करने के लिए बंद करने की नौबत आ गई है। जबकि अस्पताल प्रशासन संक्रमण फैलने के डर से ऑपरेशन थियेटर पहले ही बंद कर चुका है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो जिला अस्पताल में उपचार नहीं, संक्रमण मुफ्त मिलेगा, क्योंकि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद पिछले तीन दिनों से अस्पताल परिसर में साफ सफाई व्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है। ऐसी स्थिति में ऑपरेशन थियेटर के साथ लेबर रूम को भी संक्रमण मुक्त (फ्यूमिगेट) किया जा सकता है। तीन दिन तक लेबर रूम बंद होने के कारण जिला अस्पताल पहुंचने वाले गर्भवती महिलाओं को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
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अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने के कारण महिलाओं को निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ेगा। जब से कर्मचारियों की हड़ताल शुरू हुई है, तभी से सिजेरियन के लिए गर्भवती महिलाओं को करनाल कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल के गायनी विभाग में प्रतिदिन 15 से 20 महिलाओं की डिलीवरी की जा रही हैं।
सामुदायिक केंद्र बाबैन में भी खोला मोर्चा
दरअसल, मानदेय न मिलने के कारण एलएनजेपी अस्पताल में ही नहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बाबैन में भी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने खातों में वेतन न आने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखने का एलान किया हुआ है। बुधवार को भी कर्मचारी खातों में वेतन न आने तक हड़ताल जारी रखने पर अडिग रहे। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने बुधवार को उपायुक्त मुकुल कुमार से मुलाकात की। हालांकि इस दौरान कर्मचारियों का दुखड़ा सुनने के बाद उपायुक्त ने वीरवार शाम तक सभी का वेतन जारी कराने का आश्वासन दिया। इस दौरान यह भी सामने आया कि गलत खाता नंबर के चलते करीब 40 कर्मचारियों का अप्रैल माह से मानदेय अटका हुआ है। कर्मचारी ठेकेदार के सुपरवाइजरों को कई बार सभी दस्तावेज भी सौंप चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों का वेतन हर माह अटक रहा है। हालांकि उपायुक्त के संज्ञान लेने के बाद बुधवार को ही सभी दस्तावेजों की सभी खामियां दुरुस्त की गई हैं।
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हड़ताल के चलते अस्पताल में संक्रमण फैलने का खतरा मंडराने लगा है। साफ-सफाई न होने के चलते आपातकालीन, लेबर रूम और ओटी में फर्श पर खून के धब्बे जम चुके हैं। शौचालय बदहाल हो चुके हैं और डस्टबिन कूड़े-कचरे से भर चुके हैं। मरीजों की चादर नहीं बदली जा रही है। मरीज खुद साफ-सफाई रखने का प्रयास कर रहे हैं।
दूसरे दिन कामकाज ठप, आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों ने की नारेबाजी
उधर, सीएचसी बाबैन में भी आउटसोर्सिंग पर लगे 34 कर्मचारियों ने वेतन न मिलने के विरोध में दूसरे दिन कामकाज छोड़ हड़ताल जारी रखी। इस दौरान कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग और ठेकेदार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारी गौरव कुमार ने कहा कि उन्होंने कोरोना काल में अपनी जान की परवाह न करके काम किया, लेकिन अब उन्हें वेतन न देकर परेशान किया जा रहा है। जबकि त्योहार भी सिर पर हैं। सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारी गरीब परिवार से संबंध रखते हैं। पिछले कई महीनों से वेतन नहीं मिला। इसकी वजह से उन्हें अपने घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। कहा कि त्योहारी सीजन आ चुका है, लेकिन पैसों के अभाव में वे त्योहार कैसे मनाएंगे ?
जल्द जारी किया जाएगा वेतन: डॉ. अनुपमा
उप सिविल सर्जन डॉ. अनुपमा सिंह ने कहा कि कई कर्मचारियों के दस्तावेजों में कमी मिलने के कारण बुधवार को वेतन जारी नहीं किया जा सका, लेकिन ठेकेदार की ओर से दस्तावेजों संबंधित सभी खामियों को पूरा कर लिया है। उम्मीद है कि जल्द से जल्द सभी कर्मचारियों का वेतन जारी किया जाएगा।
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