जिले में हलकी बारिश के साथ तेज हवा ने एक बार मौसम में ठंडक पैदा कर दी है। रविवार रात को हल्की बौछार के बाद सोमवार सुबह 11 बजे तक बूदाबांदी का सिलसिला जारी रहा।
बरसात के साथ तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। पिछले कुछ दिनों से मौसम में परिवर्तन होने के कारण गर्मी होने लगी थी, लेकिन बरसात और तेज हवा ने लोगों को दोबारा सर्दी के कपड़े पहनने पर मजबूर कर दिया।
उधर, किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं। बरसात का फसल पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडे़गा। इसमें सबसे बड़ी मुसीबत तेज हवा है।
किसानों और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि तेज हवाएं चलने से फसल गिरने का भय बना रहेगा। यदि फसल गिरी, तो फिर किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पडे़गा।
कृषि विशेषज्ञ ओपी लठवाल ने बताया कि बरसात का नहीं, तेज हवा का प्रतिकूल प्रभाव फसल पर पडे़गा। फिलहाल, ऐसी बरसात फसल पर कोई भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं डाल पाएगी, लेकिन यदि तेज हवा का क्रम जारी रहा, तो फिर फसल गिरने का खतरा बना रहेगा।
उधर, पूर्व कृषि वैज्ञानिक डॉ. सी.बी. सिंह ने बताया कि गेहूं की फसल मार्च माह में पकाव की तरफ रुख करती है। अप्रैल के प्रथम सप्ताह में कहीं-कहीं कटाई भी शुरू हो जाती है।
इस बार मौसम का मिजाज किसानों को समझ नहीं आ रहा है। खेत में नमी होने से अभी भी पौधे पकाव की ओर रुझान नहीं कर पा रहे हैं।