नवरात्र उत्सव के चलते शनिवार को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में मां भद्रकाली मंदिर में मां कालरात्रि की पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। दिन भर ढोल नगाड़ों के साथ श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रहा। शनिवार को विशेष दिन होने के कारण मंदिर के कपाट खुलने से पहले सुबह तीन बजे से ही मंदिर में भक्तों की भारी लाइन लग गई थी और शाम तक यह सिलसिला जारी रहा।
शक्तिपीठ में मां भद्रकाली जी को गुलाबी वस्त्रों से सजाया गया था। मंगला आरती सुबह पांच बजे मंदिर की मुख्य पुजारिन शिमला देवी द्वारा की गई जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में देवेंद्र गर्ग सहपरिवार पहुंचे। आरती में मुख्य रूप में मां को प्रिय गुड़ का भोग लगाया और लौंग चढ़ाते हुए 108 बार ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै, ऊं कालरात्रि दैव्ये नम: मंत्र का जाप किया और नवपत्रिका पूजा की गई जिसमें नौ तरह के पेड़ पौधों जिसमें तुलसी, आम, पान, पीपल, अनार, बढ़, निंबू, नीम और कमल से मिलाकर बनाए गए गुच्छे से मां दुर्गा, मां भद्रकाली और मां कालरात्रि का आह्वान किया गया।
कंजक श्लोका पंडित (कुहू) के हाथ से खजाना लेते भक्त अपने आप को बहुत ही सौभाग्यशाली मानते दिखाई दिए। सुबह 10 बजे मनोकामना पूर्ण हवन यज्ञ किया गया, जिसमें मुख्य यजमान के रूप में एस के गोयल, कैथल ने सहपरिवार शिरकत की। हवन में सर्वप्रथम सभी देवी-देवताओं का आह्वान किया गया और हवन कुंड में आम की लकड़ी पर अग्नि प्रज्ज्वलित की गई।
अग्नि प्रज्ज्वलित करने के पश्चात इस पवित्र अग्नि में सामग्री जैसे धूप, जौ, नारियल, गुग्गुल, मखाना, काजू, किसमिस, छुहारा, मूंगफली, बेलपत्र, शहद, घी, सुगंध, अक्षत, काष्ठ इत्यादि पदार्थों की आहुति दी गई। भद्रकाली महाकाली किल-किल फट स्वाहा मंत्र की 21 बार आहुति दी गई, गणेश मंत्र, विष्णु मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र इत्यादि मंत्रों के साथ स्वाहा की गूंज से दिव्य वातावरण का अनुभव भक्तों को महसूस हुआ।
उधर मां के आशीर्वाद स्वरुप खजाने को लेने के लिए भक्त बहुत ही लालायित दिखाई दिए। मुख्य पुजारिन शिमला देवी ने कहा कि यह खजाना पाने वाले सौभाग्यशाली भक्तों की झोली मां भद्रकाली धन, लक्ष्मी, वैभव, सौभाग्य से परीपूर्ण करेंगी। इस मौके पर हेमराज शर्मा, धर्मपाल गोयल, मीना जोशी, शकुंतला देवी, स्नेहिल शर्मा, देवांशु शर्मा, निकुंज शर्मा, देवेंद्र गर्ग हाबड़ी, रामपाल लाठर, हाकम चौधरी, अनिल, आशीष दीक्षित, राकेश, विशु सन्धु, प्रवीण इत्यादि भक्त उपस्थित रहे ।
मां कालरात्रि को शुभंकरी भी कहा जाता है: पीठाध्यक्ष
पीठाध्यक्ष पं. सतपाल शर्मा ने बताया कि भक्तों का हमेशा कल्याण करने के कारण ही मां कालरात्रि को शुभंकरी भी कहा जाता है। मां कालरात्रि व्यक्ति के सर्वोच्च चक्र सहस्त्रार को नियंत्रित करती हैं। देश में नवरात्रि के सातवें दिन से महापूजा शुरू होती है, इसलिए इसे महासप्तमी भी कहा जाता है। मंगला आरती के बाद शिमला देवी, देवांशु शर्मा व मां की प्यारी कंजक श्लोका पंडित द्वारा भक्तों में मां भद्रकाली का अनमोल खजाना भी पूरे दिन वितरित किया गया जिसे पाकर भक्त बहुत ही प्रसन्न दिखाई दिए।
धर्मकक्ष के लोकार्पण से पहले वैदिक मंत्रों द्वारा विधिवत पूजा
धर्मकक्ष के लोकार्पण से पहले वैदिक मंत्रों द्वारा विधिवत पूजा की गई और बैंड बाजों- ढोल नगाड़ों के साथ धूम धाम से उद्घाटन किया गया। पीठाध्यक्ष ने बताया कि धर्मकक्ष को ओर भी व्यवस्थित और बड़ा बनाया गया है। शनिवार को नवरात्रि व्रत भंडारा व अन्नपूर्णा भंडारे का आयोजन पूरे दिन ही किया गया। 6:00 बजे संध्या कालीन 505 ज्योत महाआरती में कन्या पूजन, नव दुर्गा पूजन व भारत माता पूजन भी किया गया। मंदिर में अन्य कई न्यायाधीशों, केंद्र व प्रदेश सरकार के कई आला अधिकारियों ने भी अपने परिवार सहित दर्शन व पूजन किया व मंदिर में स्थापित सरस्वती व लक्ष्मी यंत्र पर स्वास्तिक बना कर पूजा की।