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डीजल के दाम बढ़ने से फसलों की लागत बढ़ी, किसान परेशान

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खेत में गेहूं की कटाई करती कंबाइन। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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सुनील धीमान
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कुरुक्षेत्र। गत वर्ष की तुलना में डीजल के दाम में 15.73 रुपये प्रति लीटर का इजाफा होने से फसलों की लागत बढ़ गई है। इससे किसान परेशान हैं। वहीं बेमौसम की बारिश और अचानक तापमान में वृद्धि के बाद किसानों पर डीजल की बढ़ी कीमतों से दोहरी मार पड़ रही है। डीजल के दाम बढ़ने से फसल की बुवाई, कटाई और फसल को मंडी पहुंचाने से लेकर तूड़ी बनाने में प्रति एकड़ डेढ़ से दो हजार रुपये का इजाफा हो गया है।
गत वर्ष गेहूं के सीजन के मुकाबले में इस सीजन में डीजल के दाम में प्रति लीटर 15.73 रुपये बढ़े हैं, जिस कारण कंबाइन से फसल काटना, ट्रैक्टर-ट्राली से फसल मंडी पहुंचाना (किराया) और रीपर से तूड़ी बनाना प्रति एकड़ 20 फीसदी महंगा हो गया है। पिछले साल सीजन में डीजल का दाम 81.15 रुपये प्रति लीटर था। वर्तमान में डीजल का दाम 96.88 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।
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डीजल की कीमत बढ़ने से कंबाइन से फसल काटने के दाम भी 500 रुपये बढ़ गए हैं। ट्रैक्टर-ट्राली के किराए में भी 500-700 रुपये की वृद्धि हुई है। इसी तरह रीपर से तूड़ी बनाना भी महंगा हो गया। पहले जहां 1500 रुपये में तूड़ी बनती थी, अब उसके लिए किसानों को 300 से 500 रुपये अधिक चुकाने पड़ रहे हैं।
उधर, किसानों का कहना है कि डीजल के दाम बढ़ने से कटाई और किराए-भाड़े में दो हजार रुपये प्रति एकड़ की वृद्धि हुई है, मगर गेहूं के दाम में प्रति क्विंटल मात्र 40 रुपये का मामूली सा इजाफा हुआ है, जबकि इस सीजन गेहूं का उत्पादन भी गत वर्ष की तुलना में 20 फीसदी कम है।
बेमौसम की बारिश और अचानक तापमान में वृद्धि के कारण भी उनको नुकसान झेलना पड़ा है। इसके अलावा पिछले साल गेहूं का रकबा एक लाख 10 हजार हेक्टेयर था, जिसमें इस साल 15-20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। शनिवार को भाकियू ने किसानों को साथ लेकर गेहूं की खराब फसल पर मुआवजा देने तथा 500 रुपये बोनस देने की मांग के लिए तीन घंटे तक टोल फ्री करके रोष व्यक्त किया था।
गांव बारवा के किसान बलबीर सिंह ने बताया कि उसने ढाई एकड़ में गेहूं की फसल लगाई थी। डीजल के दाम बढ़ने से कंबाइन के किराए में 500 रुपये प्रति एकड़ का इजाफा हुआ है। पिछले साल कंबाइन से फसल कटाई का दाम 1800-2000 रुपये था। इस साल उसे कटाई के लिए प्रति एकड़ 2300 रुपये चुकाने पड़े।
ट्रैक्टर-ट्राली चालक बलकार ने बताया कि गत वर्ष 10 किलोमीटर तक फसल मंडी पहुंचाना दो हजार रुपये में हो जाता था। डीजल के दाम बढ़ने से किसानों को 500 रुपये अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। अगर मंडी 10 किमी से ज्यादा दूरी पर है तो उसके लिए अलग से किराया है। उसके लिए 200-300 रुपये अधिक देने पड़ते हैं।
किसान राकेश कुमार ने बताया कि तूड़ी बनाना भी महंगा हो गया है। रीपर से तूड़ी बनाने में प्रति एकड़ 500 रुपये बढ़े हैं। यह डीजल के दाम बढ़ने से हुआ है। पहले जहां रीपर से तूड़ी बनाने के लिए प्रति एकड़ डेढ़ हजार रुपये देने पड़ रहे थे अब उसके लिए दो हजार से ज्यादा देने पड़ रहे हैं। साथ में ट्रैक्टर का खर्च अलग से उठाना पड़ रहा है।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रदीप मिल ने बताया कि इस साल जिले में सरसों के क्षेत्र और पैदावार में इजाफा हुआ है। जिले में सरसों के क्षेत्र तीन हजार से बढ़कर आठ हजार हो गया है। हालांकि गेहूं के एक लाख 10 हजार हेक्टेयर में से करीब आठ-10 हजार एकड़ कम हुआ है। संवाद

थानेसर अनाज मंडी में रखे गेहूं से भरे कट्टे। संवाद- फोटो : Kurukshetra

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