आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री-प्राइमरी स्कूल खोलने के दावा जरूर किया जा रहा है, लेकिन जिले के कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर लटके ताले अभी तक नहीं खुले। आंकड़ों के अनुसार कुरुक्षेत्र जिले में कुल 1075 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, लेकिन इनमें से 29 आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यकर्ताओं की नियुक्ति नहीं की जा सकी और करीब 40 केंद्रों पर सहायक की कमी खिल रही है। ऐसे हालातों में भला नौनिहालों को कैसे सुविधा मिलेगी ? अमर उजाला लगातार अभियान के जरिए जिले की आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति उजागर कर रहा है।
जानकारी के अनुसार जिलेभर की 1075 आंगनबाड़ी केंद्रों में छह वर्ष तक आयु वर्ग के 67 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। इन सेंटरों पर 1046 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 1035 हेल्पर सेवाएं दे रही हैं, जबकि 69 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों की नियुक्ति अभी बाकी है।
आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन की राज्य प्रधान कलावती सैन का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों की भर्ती को लेकर कई बार पत्र भी लिख चुकी हैं। जहां वर्कर है वहां हेल्पर नहीं और जहां हेल्पर है वहां वर्कर नहीं। ऐसे केंद्रों का संचालन करना काफी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्ले स्कूल के नाम पर वर्करों की छंटनी जा रही हैं, जिसका वे विरोध कर रही हैं। कहा कि सरकार छंटनी बंद करें और सभी को प्ले वे की ट्रेनिंग दी जाए।
जिला कार्यक्रम अधिकारी नीतू रानी का कहना है कि कोविड के चलते पिछले लंबे समय से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों की भर्ती नहीं की जा सकी, लेकिन अब सरकार की ओर से जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जहां-जहां वर्कर और हेल्पर नहीं हैं, वहां जल्द नियुक्ति की जाएगी।
कुरुक्षेत्र। आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर शुक्रवार को प्रदर्शन किया और नप की निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ताज पार्क में एकत्रित हुई और वहां से प्रदर्शन करते हुए विधायक के आवास पर पहुंची।
आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर यूनियन की सदस्य जिला प्रधान परमजीत कौर व सचिव कलावती की अगुवाई में शुक्रवार को विधायक सुभाष सुधा के निवास पर पहुंची। विधायक की अनुपस्थिति में सदस्यों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन नप की निवर्तमान अध्यक्षा उमा सुधा को सौंपा। यूनियन की जिला सचिव कलावती ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा 2018 में वायदा किया था कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व हेल्पर को श्रमिकों दर्जा दिया जाएगा, लेकिन आज तक सरकार ने इसे लागू नहीं किया। ज्ञापन में मांग की गई है कि केंद्र सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का वेतन 1500 रुपये व हेल्पर का 750 रुपये बढ़ाए जाने की घोषणा की थी, लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा आज तक उन्हें बढ़ाया गया वेतन नहीं दिया गया। उनकी मांगों में सुपरवाइजर के सभी पद वर्कर की सीधा भर्ती से भरे जाए, हेल्पर की पदोन्नति को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत जाए, शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया बढ़ाया जाए, शहरी क्षेत्रों में खाना बनाने वाली लेबर का पैसा पिछले दो वर्षों से बकाया है, उसे दिया जाए, स्कूलों की तर्ज पर गर्मियों व सर्दियों की छुट्टियां दी जाएं, वर्ष 2018 में हड़ताल के दौरान वर्कर्स व हेल्पर्स का एक माह का वेतनमान बकाया है, उसे दिया जाए, पेंशन सुविधा दी जाए ,मेडिकल अवकाश दिया जाए, एनजीओ का दखल बंद करके सरकार सीधा काम कराए, कोविड 19 के दौरान वर्कर व हेल्पर की मौत के बाद परिजनों को 50 लाख रुपये दिए जाए। उन्होंने कहा कि सेवानिवृति के पश्चात आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर को 50 लाख की सहायता राशि दी जाए।