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ग्लूकोमा से आंखों की खोई रोशनी नहीं आएगी वापस

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सफेद मोतिया और काला मोतिया (ग्लूकोमा) दोनों का फर्क समझने की जरूरत है, क्योंकि सफेद मोतिया का सामान्य ऑपरेशन करके आंखों की रोशनी वापस लाई जा सकती है, लेकिन ग्लूकोमा के कारण आंखों की खोई रोशनी वापस नहीं लाई जा सकती। सफेद मोतिया ज्यादातर उम्रदराज लोगों को होता है। उम्र के हिसाब से व्यक्ति को धुंधला दिखाई देता है, लेकिन ऑपरेशन करके सफेद मोतिया का ठीक किया जा सकता है।
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यह कहना है जिला अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन मेहता का। डॉ. मेहता का कहना है कि आंखों का ख्याल न रखा जाए तो छोटी-सी परेशानी जिंदगी भर की तकलीफ बन सकती है, क्योंकि काला मोतिया किसी की उम्र में हो सकता है। यह ऐसी बीमारी है कि इससे शुरुआती दौर में कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन खोई हुई रोशनी को वापस नहीं लाया जा सकता। डॉ. गुंजन मेहता का कहना है कि काला मोतिया के अधिकतर मामलों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते और न ही दर्द होता है। बताया कि काला मोतिया में हमारी आंखों की ऑप्टिक नर्व पर दबाव पड़ता है, जिससे उन्हें काफी नुकसान पहुंचता है। अगर ऑप्टिक नर्व पर लगातार दबाव बढ़ता रहेगा तो वो नष्ट भी हो सकती हैं।
इस दबाव को इंट्रा ऑक्युलर प्रेशर कहते हैं। हमारी आंखों की ऑप्टिक नर्व ही सूचनाएं और किसी चीज का चित्र मस्तिष्क तक पहुंचाती हैं। यदि ऑप्टिक नर्व और आंखों के अन्य भागों पर पड़ने वाले दबाव को कम न किया जाए तो आंखों की रोशनी पूरी तरह जा सकती है। इसलिए अपनी आंखों के प्रति सतर्क रहें और समय-समय पर अपनी
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दृष्टि में धुंधलापन या अस्पष्टता-बुजुर्गों में निकट दृष्टि दोष में निरंतर बढ़ोतरी-रंगों को देखने की क्षमता में बदलाव। वाहन चलाते में दिक्कत आना।
ओपन एंगल ग्लूकोमा में शुरुआती दौर में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन जब समस्या गंभीर हो जाती है तब आंखों में ब्लाइंड स्पॉट बनने लगते हैं। आंखों और सिर में तेज दर्द होना, नजर कमजोर होना, धुंधला दिखाई देना, आंखें लाल होना, रोशनी के चारों ओर रंगीन छल्ले दिखाई देना, जी मचलाना व उल्टी होना शामिल हैं।
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