आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की कड़ी में शनिवार को श्री कृष्णा आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि के रूप में उपायुक्त मुकुल कुमार और विशिष्ट अतिथि के रूप में आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलदेव धीमान ने शिरकत की, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना ने की। इस अवसर पर मुख्यातिथि उपायुक्त मुकुल कुमार ने कहा कि आयुर्वेद विश्व की सबसे प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है जो कि अनादि एवं शाश्वत है। जो शास्त्र या विज्ञान आयु का ज्ञान कराए उसे आयुर्वेद की संज्ञा दी गई है। उपायुक्त ने कहा कि ऋग्वेद मनुष्य जाति के लिए उपलब्ध प्राचीनतम शास्त्र है, आयुर्वेद की उत्पत्ति भी ऋग्वेद के काल से ही है। ऋग्वेद के अलावा अथर्ववेद में भी आयुर्वेदिक विषयक उल्लेख हैं तथा आयुर्वेद को अथर्वेद का उपवेद माना जाता है।
कार्यक्रम में वशिष्ट अतिथि कुलपति डॉ. बलदेव धीमान ने कहा कि ऐसा माना जाता है कि सृष्टि की उत्पत्ति के समय ब्रह्मा जी ने आयुर्वेद का स्मरण किया तथा इस ज्ञान को उपदिष्ट किया। चरक संहिता के अनुसार आयुर्वेद का प्रयोजन है स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य का संरक्षण करना एवं यदि व्यक्ति रुग्ण हो जाता है तो उसकी चिकित्सा करना। इस अवसर पर कार्यक्रम में अनेक आयुर्वेद मनीषियों एवं विशेषज्ञों को सम्मानित भी किया गया। इससे पहले छात्रों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। योगाभ्यास के कार्यक्रम एवं नृत्यमातिका ने सभी का मन मोह लिया। संयोजक एवं चेयरमैन आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. देवेंद्र खुराना ने कहा आयुर्वेद दिवस का कार्यक्रम एक दिवस का कार्यक्रम न होकर पूरे 15 दिन तक हमने सांस्कृतिक एवं खेल उत्सव के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर कोरोना काल में सराहनीय कार्य करने वाले संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों को सम्मानित किया गया।
वहीं श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में दो नवंबर को अष्ट कुंडीय हवन यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। ये हवन यज्ञ 6वें आयुर्वेद दिवस व भगवान धन्वंतरि अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में होगा। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद विशेष रूप से उपस्थित होंगे। मुख्य वक्ता के रूप में हिमाचल प्रदेश सरकार से सेवानिवृत्त उप निदेशक आयुर्वेद डॉ. राकेश पंडित मौजूद रहेंगे। विश्वविद्यालय में हवन कुंड बना दिए हैं। डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. आशीष मेहता ने बताया कि दो नवंबर को सुबह साढ़े ग्यारह बजे अष्ट कुंडीय हवन यज्ञ का शुभारंभ होगा। इस दिन को आयुर्वेद दिवस व भगवान धन्वंतरि अवतरण दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। अष्ट कुंडीय हवन यज्ञ का आयोजन आयुर्वेद के आठ अंगों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। आठ अंगों में काय चिकित्सा, बाल, ग्रह, उधर्वांग, शल्य, अगद, जरा और वृष आते है, जिसको अष्टांग आयुर्वेद के नाम से जाना जाता है। हर कुंड को आयुर्वेद के आठ अंगों के नाम दिये गए है मुख्य कुंड को काय कुंड नाम दिया है।