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Haryana: इसरो के वैज्ञानिक स्वास्तिक सैनी ने बताई चंद्रयान-थ्री की सफल लैंडिंग की भावुक कहानी, पढ़ें रिपोर्ट

Sat, 11 Nov 2023 08:42 AM IST
नवीन दलाल राजरानी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)

सार

इसरो के वैज्ञानिक डी स्वास्तिक सैनी ने अमर उजाला के साथ अपने अहमदाबाद कार्यालय के उस दौरान के पलों पर खुलकर चर्चा की। वे यहां गीता निकेतन आवासीय विद्यालय के पूर्व छात्र मिलन समारोह में पहुंचे थे। इस दौरान भी वे दूसरे छात्रों के लिए प्रेरणा बने रहे।
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वैज्ञानिक स्वास्तिक सैनी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंद्रयान-थ्री की लैंडिंग होने से पहले जिस कदर पूरे देश की आंखें टेलीविजन की स्क्रीन पर थीं कि आगे क्या होगा। वैज्ञानिक सफल लैंडिंग की कामना करते हुए एक-एक पल को बिना पलक झपकाए देख रहे थे। जैसे ही यह सफल लैंडिंग हुई तो पूरा देश खुशी से झूम उठा तो इसे अंजाम देने में करीब चार वर्षों से लगे वैज्ञानिकों की आंखों से भी खुशी के आंसू निकल आए थे।

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ये आंसू उनकी कड़ी मेहनत और पूरे देश के विश्वास के थे। भावुक हुए वैज्ञानिकों के पास एक-दूसरे को बधाई देने के लिए भी कोई शब्द तक नहीं था। बस उनकी आंखों में सबसे बड़ा सपना पूरा होने की खुशी थी, जिसके साथ ही आंसू छलक रहे थे। यह पहला मौका था जब शायद वैज्ञानिकों को इस अंदाज में देखा गया। ये पल जिंदगी भर नहीं भुलाए जा सकते।

इसरो के वैज्ञानिक डी स्वास्तिक सैनी ने अमर उजाला के साथ अपने अहमदाबाद कार्यालय के उस दौरान के पलों पर खुलकर चर्चा की। वे यहां गीता निकेतन आवासीय विद्यालय के पूर्व छात्र मिलन समारोह में पहुंचे थे। इस दौरान भी वे दूसरे छात्रों के लिए प्रेरणा बने रहे। बाबैन के हमीदपुर गांव के रहने वाले स्वास्तिक सैनी इसराे के अहमदाबाद कार्यालय में वैज्ञानिक डी के पद पर कार्यरत है।
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बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि चंद्रयान थ्री में लगाए गए डिटैक्शन अवाॅइडैंस कैमरे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अहमदाबाद में तैयार किए गए थे, जिसका चंद्रयान थ्री की सफल लैंडिंग होने में अहम रोल था। इन कैमरों का कार्य लैंडर को चांद की सतह पर मौजूद खतरों से बचाना और साथ ही सुरक्षित लैंडिंग को पुख्ता करवाना था। उन्होंने बताया कि चार साल की मेहनत का फल चंद्रयान थ्री की सफलता थी। चंद्रयान टू के असफल होने के बाद ही मिशन चंद्रयान- थ्री पर काम करना शुरू कर दिया गया था।

उन्होंने बताया कि डिटैक्शन अवाॅइडैंस कैमरे में ऐसे सेंसर लगाए गए थे जो कि लैंडर को चांद पर कौन सी जगह उतरना है, उसकी किसी बड़े पत्थर से टक्कर न हो और वह किसी गड्ढे में न गिर जाए, बचाव के लिए काम कर रहा था। कहा लैंड करना है यह तय करने में कैमरों ने लैंडिंग से पहले चांद की तस्वीरें ली और समतल जगह होने पर लैंडर ने लैंड किया। इन कैमरों को तैयार करने के लिए लगभग 50 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने काम किया था।

इसरो वैज्ञानिक पहुंचे तो खुशी से झूम उठे छात्र व शिक्षक

स्वास्तिक सैनी की कक्षा 6वीं से 10वीं तक की शिक्षा गीता निकेतन आवासीय विद्यालय में 2012 में पूरी हुई और 12वीं तक की शिक्षा संजय गांधी स्कूल लाडवा में की, उसके बाद आईआईटी खड़कपुर में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इलेक्ट्रिकल कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक की डिग्री 2019 में करने के बाद ही इनका प्लेसमेंट अहमदाबाद में वैज्ञानिक डी के पद पर हुआ था। शुक्रवार को वे विद्यालय पहुंचे तो अन्य छात्र व शिक्षक खुशी से झूम उठे।
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इसी स्कूल की देन, आज देश के लिए कर पा रहा काम

वैज्ञानिक स्वास्तिक सैनी ने बताया स्कूल में लौटने के बाद अपनी पुरानी यादें ताजा हुई है और कामयाब होने के बाद अध्यापकोंं का वह रवैया जो कामयाब करने के समय निभाया गया वह बदला हुआ दिखा। उन्होंने बताया कि 10वीं तक की स्कूली शिक्षा की देन है कि वैज्ञानिक के तौर पर देश के लिए काम कर पा रहा हूं। स्कूल के समय सिखाए गए अनुशासन के गुर आगे की पढ़ाई में और जीवन में कोई भी काम करने के लिए ऊर्जावान बनाते हैं।
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