कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विदेश मंत्रालय और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय 10वें अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन का समापन बुधवार को हुआ। श्रीमद्भगवद्गीतोक्त स्वधर्म : कर्तव्यनिष्ठा, शांति, सद्भावना एवं स्वदेशी की प्रेरणा विषय पर आधारित यह सम्मेलन गीता की वैश्विक प्रासंगिकता को सशक्त रूप से स्थापित करने वाला ऐतिहासिक आयोजन सिद्ध हुआ।
इसी के साथ सम्मेलन शोध के नए आयाम स्थापित करने में अभूतपूर्व साबित हुआ। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि इस वर्ष सम्मेलन में 835 शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण होना सबसे बड़ी उपलब्धि रही। यह संख्या दर्शाती है कि गीता न केवल धार्मिक दर्शन का विषय है बल्कि आज भी शोध और अकादमिक विमर्श का महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है। वैश्विक आयोजन में अमेरिका, जापान, चीन, हंगरी, स्पेन, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया सहित 16 देशों के विद्वानों ने हिस्सा लिया जिन्होंने अपने शोध और विचारों से सम्मेलन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
कुलपति ने कहा कि गीता का ज्ञान हर युग के लिए मार्गदर्शक है और यह जीवन, नेतृत्व, कर्तव्य, शांति और मानवीय मूल्यों को नई दिशा देता है। विश्वविद्यालय के 15 विभागों में आयोजित 13 तकनीकी सत्रों में अलग-अलग क्षेत्रों से शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रत्येक सत्र में सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र निकाला गया। सम्मेलन के निदेशक प्रो. तेजेंद्र शर्मा ने बताया कि तीन दिनों तक देश-विदेश के विद्यार्थियों, प्रोफेसरों और शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी वक्ताओं का मत था कि गीता का संदेश विश्व शांति, सद्भाव, आत्म अनुशासन और मानवीय मूल्यों की स्थापना में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। गीता सम्मेलन शोध, संवाद और वैश्विक विचार-विमर्श का एक उत्कृष्ट मंच बनकर उभरा, जिसने गीता के दर्शन को आधुनिक दुनिया के लिए और अधिक प्रासंगिक बनाकर सिद्ध किया।
विधि विभाग में आए सर्वाधिक 175 शोध पत्र
तकनीकी सत्रों में विधि विभाग में सर्वाधिक 175 शोध पत्र प्राप्त हुए। इसी के साथ प्रबंधन अध्ययन और इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से 159, सामाजिक कार्य विभाग से 74, ललित कला विभाग से 74, पर्यटन एवं होटल प्रबंधन विभाग से 57, संस्कृत, पाली एवं प्राकृत विभाग से 56, गृह विज्ञान विभाग से 53, प्राचीन भारतीय इतिहास एवं गीता अध्ययन केंद्र से 52 प्रतिभागी शामिल हुए हैं। वहीं आईआईएचएस की ओर से आयोजित तकनीकी सत्र में 33, पंजाबी विभाग में 30, यूआईईटी संस्थान की ओर से आयोजित तकनीकी सत्र में 27, डॉ. भीमराव अंबेडकर अध्ययन केंद्र में 26 और आईटीटीआर में 19 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
इन्हें मिला सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र सम्मान
सम्मेलन के दौरान विभिन्न विभागों से उत्कृष्ट शोध प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को बेस्ट पेपर अवार्ड से सम्मानित किया गया। इनमें विद्यार्थी सागर (प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग), प्रो. तरविंदर जीत कौर व शोधार्थी स्वाति शर्मा (गृह विज्ञान विभाग), शोधार्थी राजवंत कौर (ललित कला विभाग), क्षितिज शिंगल, अवनेश वर्मा, राजुल मिश्रा, अमित सक्सेना (पंजाबी विभाग), डॉ. हरमीत कौर (यूआईईटी), शोधार्थी रेनू (विधि विभाग), सहायक प्रोफेसर डॉ. दिनेश धनखड़, डॉ. पूनम कंडू व शोधार्थी योगेश दहिया (पर्यटन और होटल प्रबंधन विभाग), अनुशका मदान (यूएसएम), प्रज्ञा पांडे (आईआईएचएस) और डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता (डॉ बीआर आंबेडकर अध्ययन केंद्र) को सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र सम्मान से सम्मानित किया गया।
कुरुक्षेत्र। बेस्ट पेपर अवार्ड से शोधार्थियों को सम्मानित करने के दौरान प्रोत्साहित करते कुलप