लाडवा नगरपालिका के प्रधान और उपप्रधान पद के नतीजे के लिए उच्च न्यायालय ने दोनों पदों के प्रत्याशियों, पार्षदों और कस्बावासियों का इंतजार बढ़ा दिया है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सोमवार को पालिका के प्रधान और उपप्रधान पदों के चुनाव में सांसद और विधायक के वोट डालने के मामले की सुनवाई के दौरान इस मामले में अब 28 जुलाई की तारीख दे दी है। उच्च न्यायालय में वकीलों की हड़ताल के कारण अगली तिथि निर्धारित की गई है।
मामले की सुनवाई के दौरान वकीलों की हड़ताल के चलते याचिकाकर्ता पार्षद सुमित बंसल और पूर्व पालिका प्रधान मनदीप सिंह तूर न्यायालय में खुद पेश हुए। वहीं लाडवा के वार्ड-10 की पार्षद एवं प्रधान पद की प्रत्याशी साक्षी खुराना के पति अमित खुराना, पालिका सचिव हरिओम और पालिका के भवन निरीक्षक भी उच्च न्यायालय में पेश हुए। वकीलों के न आने से मामले की सुनवाई नहीं हो सकी और उच्च न्यायालय ने सुनवाई के लिए 28 जुलाई की तारीख तय कर दी है। पार्षद सुमित बंसल और पूर्व पालिका प्रधान मनदीप तूर की ओर से याचिका दाखिल करने वाले उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र बांगड़ ने कहा उन्हें उम्मीद है कि जिस दिन मामले की सुनवाई होगी, उस दिन उच्च न्यायालय का फैसला उनके मुवक्किलों के ही पक्ष में आएगा। उच्च न्यायालय के फैसले का सीधा असर लाडवा ही नहीं बल्कि उन सभी नगरपालिकाओं पर पड़ेगा, जहां अभी तक प्रधान और उपप्रधान पद के चुनाव नहीं हुए हैं।
इसलिए मामला पहुंचा उच्च न्यायालय
लाडवा नपा के पूर्व प्रधान मनदीप सिंह तथा वार्ड-12 के पार्षद सुमित बंसल शालू ने 30 जून को उच्च न्यायालय में याचिका दी थी। याचिका में कहा गया था कि सरकार द्वारा सांसद और विधायक को नगरपालिका का सदस्य मनोनीत किया जाता है, जो नपा की बैठकों में भाग ले सकतेे हैं, लेकिन इन मनोनीत सदस्यों को प्रधान और उपप्रधान के चुनाव में वोट डालने का अधिकार नहीं है। ऐसे में क्या सांसद और विधायक को लाडवा नगर पालिका के प्रधान एवं उपप्रधान के चुनाव में वोट डालने का अधिकार है। इस याचिका पर उच्च न्यायालय ने 4 जुलाई को तय प्रधान और उपप्रधान के चुनाव में पार्षदों की वोट अलग, सांसद और विधायक की वोट अलग डलवाकर एवं सील कराकर 5 जुलाई को अपने पास पहुंचाने के आदेश दिए थे। 5 जुलाई को वकीलों की हड़ताल के चलते उच्च न्यायालय ने 18 जुलाई की तारीख दी थी और 18 जुलाई को भी वकीलों की हड़ताल के चलते सुनवाई 28 जुलाई तक टल गई है।