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बारिश में बहा किसानों का पीला सोना, प्रशासन ने लगाई मदद की गुहार

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वीरवार को हुई बारिश से किसानों पीला सोना पानी में बह गया। किसानों ने मार्केट कमेटी प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि कमेटी की तरफ से न तो तिरपाल उपलब्ध कराया गया और न ही धान शेड के नीचे रखने की इजाजत दी जा रही है। दोपहर जैसे ही बारिश शुरू हुई किसान मंडी में फैलाई अपनी धान की फसल को समेटने के प्रयास में जुट गए, लेकिन देखते ही देखते बारिश तेज हो गई, जिससे मंडी में पड़ा कई एकड़ धान भीग गया है, बहुत सा धान पानी में बह गया।
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किसान जयप्रकाश, शेर सिंह, लव-कुश, अनिल, सलिंदर, जगबीर सिंह व रणधीर ने बताया कि वह सुबह ही अपनी पीआर धान मंडी में लेकर आए थे। धान को यहां उन्होंने मंडी में फड़ी पर फैला दिया था। दोपहर बाद साढ़े तीन बजे आई अचानक तेज बारिश में उनका कई एकड़ धान पानी में बह गया। किसान जयप्रकाश, शेर सिंह ने मायूस होते हुए कहा कि वह एक-डेढ़ एकड़ जमीन पर खेती करते हैं। दो ट्रालियों में अपनी धान की फसल को लेकर मंडी आए थे और यहां सुखाने के लिए डाली हुई थी। बारिश के कारण आधे से ज्यादा धान भीग गया।
कहां से देंगे 60 हजार रुपये का ठेका
किसान शेर सिंह और जयप्रकाश ने कहा कि उन्होंने 60 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन ठेके पर ली हुई है और धान लगाने पर 15 हजार रुपये खर्च किया हुआ है। मंडी धान लाए थे, जिसमें से आधा धान बारिश में बह गया। अब उन्हें चिंता सता रही है कि वह अपना घर कैसे चलाएंगे और ब्याज पर लिया पैसा कैसे चुकाएंगे। उन्होंने प्रशासन से उन के नुकसान की भरपाई करने की अपील की।
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10 सितंबर से शुरू होनी चाहिए थी खरीद
किसानों ने कहा कि पीआर धान का हाइब्रिड बीज 90 दिन में पक कर तैयार हो जाता है। 15 जून से 15 सितंबर तक 90 दिनों में लगभग सभी किसानों की पीआर धान पक कर तैयार हो चुकी है, लेकिन सरकार द्वारा शुरू न करने के कारण किसानों के खून पसीने और मेहनत की कमाई पानी में बह रही है।
किसान 25 सितंबर तक धान मंडी में लेकर न आएं : अखिलेश
मार्केट कमेटी सचिव अखिलेश कुमार ने कहा कि किसानों को 25 सितंबर तक अपनी पीआर धान मंडी में न लाने के लिए कहा गया है। उन्होंने किसान संगठनों के माध्यम से पहले ही किसानों से अपील की थी कि अपना धान शेड्यूल अनुसार मंडी में लाएं। तिरपाल के बारे में उन्होंने बताया कि सभी आढ़तियों को तिरपाल उपलब्ध करवाया गया है। पानी बहे धान का मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा और किसानों की हर संभव मदद की जाएगी।
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