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नाड़ी तरंगिणी यंत्र के माध्यम से शरीर की वात, पित्त व कफ की जांच कर जागरूक कर रहे विशेषज्ञ

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अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी में आयुर्वेदिक चिकित्सक स्वास्थ्य परामर्श दे रहे हैं। नाड़ी तरंगिणी यंत्र के माध्यम से शरीर की वात, पित्त व कफ प्रकृति की जानकारी देकर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। आयुष विवि के कुलपति डॉ. बलदेव धीमान ने प्रदर्शनी में शिरकत की।
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उन्होंने कहा कि नाड़ी से रोग की पहचान करना एक विश्वसनीय तकनीक और विज्ञान है। इस तकनीक को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर नाड़ी विज्ञान को विकसित करने का प्रयास जारी है। नाड़ी परीक्षण से कई प्रकार के रोगों का पता लगाया जा सकता है। नाड़ी तरंगिणी एक इलेक्ट्रानिक डिवाइस है। इससे व्यक्ति की वात, पित्त व कफ प्रकृति का पता लगाया जाता है। इसके आधार पर रोगी के रोग का निदान किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति ढेरों विशेषताओं का समावेश किए हुए हैं। ये प्राचीन होने के साथ प्राकृतिक भी है। इस चिकित्सा पद्धति में व्यक्ति का इलाज पूर्ण रूप से किया जाता है और किसी भी प्रकार के हानि रहित उपचार के साथ प्रयोग की जाती है। रिसर्च एंड इनोवेशन विभाग के प्रो. रजनीकांत आयुष विश्वविद्यालय में चल रहे शोध की जानकारी प्रदर्शनी में आए लोगों को उपलब्ध करा रहे हैं। कोविड-19, मधुमेह, कैंसर व प्रकृति परीक्षण जैसे रोगों पर लेब में शोध चल रहे हैं। इस मौके पर डॉ. अनिल शर्मा, डॉ. सुरेंद्र सहरावत, डॉ. मनीष, डॉ. प्रीति, डॉ. शुभम, डॉ. कृति, मनोज कुमार सहित अन्य मौजूद रहे।
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