कुरुक्षेत्र। अप्रैल-मई 2021 में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का तांडव देखने के बाद स्वास्थ्य विभाग अब सबक ले चुका है। तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए जिला अस्पताल ही नहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी स्वास्थ्य सुविधाओं का बुनियादी ढांचा मजबूत किया जा रहा है।
कोरोना वायरस की दूसरी लहर के खिलाफ छिड़ी जंग के दौरान लाखों रुपये की लागत से जिला अस्पताल सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहाबाद और पिहोवा में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए हैं। जिला अस्पताल में एक हजार लीटर/प्रति मिनट क्षमता और सीएचसी पिहोवा और शाहाबाद में 500 लीटर प्रति मिनट क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। इतना ही नहीं, 50 बेड से अधिक वाले निजी अस्पताल आदेश मेडिकल अस्पताल एवं कॉलेज शाहाबाद और बीएस हार्ट केयर अस्पताल में भी ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं।
इसके अलावा जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट के साथ-साथ आईसीयू बेड, ऑक्सीजन सुविधा से लैस बेड, डी-टाईप ऑक्सीजन सिलिंडर व वेंटिलेटर सहित कई मशीनें और उपकरणों पर करोड़ों रुपये का बजट खर्च करके स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है। अब कोरोना वायरस की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग के पास 15 आईसीयू बेड, करीब 40 वेंटिलेटर, 23 बाइपैप, 320 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, ऑक्सीजन सुविधा से लैस 50 बेड सहित अन्य व्यवस्था की गई हैं।
अब यहीं होगी आरटी पीसीआर सैंपलों की जांच
कोरोना वायरस की दस्तक के बाद से ही जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा आरटी पीसीआर सैंपल जांच के लिए यमुनानगर और करनाल भेजे जा रहे थे। इसकी वजह से स्वास्थ्य विभाग का आर्थिक बोझ तो बढ़ ही रहा था। साथ ही रिपोर्ट का इंतजार में कोविड पॉजिटिव मरीज को उपचार देने में देरी होती थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला अस्पताल में ही आरटी पीसीआर लैब स्थापित की गई है। अब कोविड के संदिग्ध और पॉजिटिव मरीजों को रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यहां स्वास्थ्य विभाग द्वारा पैथोलॉजिस्ट डॉ. विनोद तंवर और अंबाला से डेपुटेशन पर आए विशेषज्ञ डॉ. अनुराग की निगरानी में लैब टेक्नीशियन जांच करेंगे।
जन स्वास्थ्य विभाग के भरोसे नहीं स्वास्थ्य विभाग
जिला स्वास्थ्य विभाग अब पेयजल के सैंपलों की जांच के लिए जन स्वास्थ्य विभाग की लैब के भरोसे नहीं है। स्वास्थ्य विभाग इसी साल जिला अस्पताल में वाटर लैब स्थापित की गई है। यहां पानी के ओटी और बीटी सैंपलों की जांच की जाएगी। समय पर रिपोर्ट मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की सिरदर्दी कम होगी और आर्थिक बोझ भी घट गया। पिछले दिनों कुरुक्षेत्र के जिला सिविल सर्जन रहे डॉ. संत लाल वर्मा ने वाटर लैब का शुभारंभ किया था।
स्थापित हुई ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रखी पिछले कई सालों से धूल फांक रही ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन का इसी साल लाइसेंस दिया गया है। इसके बाद मशीन को ब्लड बैंक में स्थापित भी किया गया है। बताया जा रहा है कि डेंगू, एड्स, बर्न और थैलेसीमिया के मरीजों को प्लाज्मा, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा, प्लेटलेट्स, आरबीसी और श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी) उपलब्ध होगी।