संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। जान जोखिम में डाल कोरोना संक्रमितों की दिन रात सेवा करने वाले कोरोना योद्धाओं को अब बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। सबसे ज्यादा घातक साबित हुई कोविड की दूसरी लहर में इन योद्धाओं ने अपनों से दूरी बनाकर लगातार कोरोना वार्ड में पीड़ितों की सेवा की है। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उस सेवा का ऐसा फल मिलेगा।
सैंपलिंग और वैक्सीनेशन सहित अन्य वार्डों में सेवाएं दे रहे इन कोरोना योद्धा को 31 मार्च तक सेंक्शन पत्र मिलने की उम्मीद थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा दो अप्रैल तक भी पत्र जारी नहीं किया गया। इस संदर्भ में जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा आश्वासन न मिलने पर इन कोरोना योद्धाओं ने मोर्चा खोल दिया और जिला सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। कोरोना योद्धाओं ने जल्द सेंक्शन पत्र जारी करने की मांग की। धरने पर बैठे कोरोना योद्धाओं को स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के राज्य कोषाध्यक्ष पंकज अत्रे, जिला अध्यक्ष डॉ. सुमित शर्मा और संगठन मंत्री डॉ. सुदेश शर्मा ने भी समर्थन दिया।
दरअसल, सितंबर 2020 में एनएचएम के अंतर्गत आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत 12 नर्सिंग ऑफिसर, 10 प्रयोगशाला तकनीशियन, छह डाटा एंट्री ऑपरेटर और आठ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। इन कोरोना योद्धाओं ने कोविड वार्ड में मरीजों को हौसले की डोज देने के साथ कोविड सैंपलिंग और टेस्टिंग में दिन रात मेहनत की।
कोरोना योद्धाओं के हड़ताल पर चले जाने के बाद कोरोना वैक्सीनेशन अभियान और सैंपलिंग पर असर देखने को मिला। शनिवार को जिलेभर में सैंपलिंग कार्य नहीं हो सका। जिला अस्पताल में सिर्फ डेंटल सर्जन ने मरीजों के रैपिड टेस्ट किए। इतना ही नहीं, स्वास्थ्य विभाग की पिछले दिनों शुरू हुई लैब में आरटी पीसीआर सैंपल की जांच का कार्य भी प्रभावित रहा।
नर्सिंग ऑफिसर नीरज का कहना है कि उन्होंने कोरोना काल में दिन रात वार्ड में मरीजों की सेवा की। दो बार खुद कोरोना संक्रमित भी हुई, लेकिन इंसानियत दिखाते हुए उन्होंने अपना फर्ज निभाया। कोरोना का डटकर मुकाबला किया। विभाग को जब जरूरत भी तब सेवाएं ली और अब बाहर का रास्ता दिखा दिया।
नर्सिंग ऑफिसर चरणजीत कौर ने कहा कि वे सितंबर 2020 से निरंतर सेवाएं दे रही हैं। कोविड की दूसरी लहर में उन्होंने अपने बच्चों को दूरी बनाकर कोरोना संक्रमितों को उपचार दिया है और अब पिछले लंबे समय से वैक्सीनेशन में हर रोज लोगों को सुरक्षा कवच पहना रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग कोरोना योद्धाओं का मान रखे।
नर्सिंग ऑफिसर शरणजीत कौर का कहना है कि जब लोग अपने घरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं है, उस वक्त उन्होंने कोरोना मरीजों के बीच रहकर सेवाएं दी। आज उन्हें सेवामुक्त किया जा रहा है। यह कोरोना योद्धाओं के साथ विश्वासघात है। सरकार कोरोना योद्धाओं की मांगों पर संज्ञान लें और जल्द सेंक्शन पत्र जारी करे।
नर्सिंग ऑफिसर सुमन देवी का कहना है कि सभी कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सेंक्शन पत्र मिल जाएगा, लेकिन विभाग की ओर से अभी तक कोई पत्र जारी नहीं किया गया। इसकी वजह से कर्मचारियों को मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस मामले में जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी कोई ठोस आश्वासन नहीं दे रहे।
आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत कार्यरत कर्मचारियों को सेंक्शन देने संबंधित कोई पत्र अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। यह पॉलिसी मैटर है, जो भी फैसला होगा ऊपर से होगा। डॉ. सुखबीर सिंह, जिला सिविल सर्जन।