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न्यूनतम मानदेय 24 हजार और स्थाई कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर आशा वर्कर्स ने किया प्रदर्शन

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न्यूनतम मानदेय 24 हजार और स्थाई कर्मचारी का दर्जा देने सहित अन्य कई मांगों के समर्थन में आशा वर्कर्स ने जिला सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले वीरवार सुबह 11 बजे आशा वर्कर जिला अस्पताल पहुंच गई थी। यहां उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उप सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र खांबरा को मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान जिला प्रधान पिंकी देवी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कोविड के दौरान एक हजार रुपये प्रति माह प्रोत्साहन राशि के रूप में आशा वर्कर को जाने की घोषणा की थी, लेकिन यह राशि सभी आशा वर्कर को नहीं मिली। उन्होंने कहा कि हर घर दस्तक अभियान के तहत एएनएम के साथ टीकाकरण कराने और दवा वितरण में उनकी ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन सरकार लगातार आशा वर्कर्स की अनदेखी करती आ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार और यूनियन के बीच वर्ष 2018 में हुए समझौते को सरकार ने अभी तक लागू नहीं किया है। यही नहीं, कोरोना काल में सेवाएं देते हुए एक आशा वर्कर की मौत हो गई थी, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों पर संज्ञान नहीं लेती तो उन्हें मजबूरन बड़ा आंदोलन करना पड़ेगा।
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यूनियन की जिला प्रधान पिंकी कहना है कि वर्ष 2018 में लंबी लड़ाई लड़ने के बाद सरकार ने उनके वेतन में नाम मात्र की वृद्धि की थी, लेकिन सरकार हमेशा आशा वर्कर की अनदेखी करती आई है। आशा वर्कर का शोषण किया जा रहा है। कहा कि सरकार ने एनएचएम कर्मचारियों को सातवें वेतन का लाभ देने की घोषणा की है, लेकिन वे न्यूनतम मानदेय 24 हजार करने की मांग कर हैं।
सचिव कुसुम लता ने कहा कि कोविड काल में सरकार आशा वर्कर को प्रति माह एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दे रही थी, लेकिन सितंबर माह के बाद से वह भी नहीं मिल रही। अब सरकार ने हर घर दस्तक अभियान के तहत ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीनेशन करने का लक्ष्य दे दिया है। अगर सरकार प्रोत्साहन राशि पुन: शुरू नहीं करती तो वे इस अभियान में कोई सहयोग नहीं देंगीं।
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उप प्रधान मनजीत ने कहा कि सरकार द्वारा फैमिली प्लानिंग के तहत आशा वर्कर को प्रोत्साहन राशि दी जाती है, लेकिन वर्ष 2015 से किसी भी आशा वर्कर को इस प्रोत्साहन राशि नहीं दी जा रही। बताया कि जिनको वे नलबंदी और नसबंदी कराने के प्रोत्साहित करते हैं, उन्हें भी प्रोत्साहन राशि नहीं मिल रही। वे बार-बार उनसे सवाल जवाब करते हैं।
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