तीर्थों की संगम स्थली कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर के तट पर तीन दिन से चल रहे देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति और राज्यों से संस्कृत एवं वेदों के महान विद्वानों के महाकुंभ का बुधवार को समापन हो गया। जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। वहीं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस सत्र में लाल बहादुर शास्त्री विश्वविद्यालय दिल्ली के कुलपति डॉ. रमेश कुमार पांडेय विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए। ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी ने कहा कि वेद हमारी भारतीय संस्कृति के पोषक हैं। वेदों को हमारे जीवन में उतारना होगा तभी संस्कारों को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में वेदों की सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं है। विद्यापीठ तो भारतीय संस्कृति की सेवा के लिए हर समय तत्पर है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ ने कहा कि उन्हें भी इस सम्मेलन में वेदों के महान ज्ञाताओं एवं देश के महान विद्वानों को सुनने का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि वेद ज्ञान का भंडार हैं। वेदों को जानने के लिए प्रचार प्रसार का होना बहुत जरूरी है। कुलपति डॉ. रमेश कुमार पांडेय ने कहा कि आज पूरे देश में वेदों और संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार के साथ आमजन को जोड़ने की आवश्यकता है। युवा वर्ग को वेदों का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री विश्वविद्यालय दिल्ली के प्रो. शिव शंकर मिश्र, जयराम शिक्षण संस्थान के उपाध्यक्ष व सेवानिवृत्त आयुक्त टीके शर्मा, निदेशक एसएन गुप्ता, केके कौशिक, डॉ. कृष्ण रल्हन, पवन गर्ग, राजेश सिंगला, श्रीजयराम संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य रणबीर भारद्वाज, रोहित कौशिक व राजेश शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।