महाभारत युद्ध के पांच हजार साल बाद कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर भगवान श्रीकृष्ण के विराटस्वरूप ने कदम धरा, जहां अर्जुन को कर्म का संदेश दिया गया था। गीता की जन्मस्थली ज्योतिसर में 10 करोड़ की लागत से तैयार भगवान श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप को उत्तर प्रदेश के नोएडा से ट्रालों की मदद से लाया गया। इस विशालकाय विराट स्वरूप के केवल चेहरे का वजन 6 टन से ज्यादा है, जिसे ट्राले से दो क्रेनों की मदद से नीचे उतार कर ज्योतिसर तीर्थ तक पहुंचाया गया। वहीं पूर्ण विराट स्वरूप के अन्य हिस्से देर रात तक और अगले दिनों में कुरुक्षेत्र पहुंचेंगे। यह प्रतिमा विश्वविख्यात मूर्तिकार रामसुतार और उनके पुत्र अनिल सुतार ने 80 कारीगरों की मदद से एक साल में तैयार की है।
अमर उजाला से बातचीत में अनिल सुतार ने बताया कि पूर्ण विराट स्वरूप की ऊंचाई 40 फुट से ज्यादा है, जो 10 फुट ऊंचे प्लेटफार्म पर स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विराट स्वरूप चार धातुओं से मिलकर बना है, जबकि 85 प्रतिशत तांबा और 15 प्रतिशत अन्य तीन धातुओं का इस्तेमाल हुआ है। इस मूर्ति को नोएडा स्थित वर्कशाप में करीब एक वर्ष में 80 कारीगरों की मदद से तैयार किया गया है।
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार कुरुक्षेत्र को विश्वमानचित्र पर लाने का प्रयास कर रही है। केवल गीता जन्मस्थली ज्योतिसर को 200 करोड़ रुपये के सरकारी अनुदान से विकसित किया जा रहा है। इस अनुदान से तीर्थ को भव्य स्वरूप और सुविधाओं के लिहाज से परिपूर्ण करने का पूरा रोडमैप तैयार किया गया है। दस करोड़ की लागत से तैयार हुआ यह विराट स्वरूप इसी योजना एक हिस्सा है, जबकि करीब 200 करोड़ प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे। इस अनुदान से गीता संदेश का साक्षी अक्षय वट वृक्ष, थीम बिल्डिंग, 6 व्याख्या हाल (इंटरप्रीटेशन हाल),शापिंग कांप्लेक्स,लैंड स्कैप, ओपन एयर थिएटर, पार्क, पार्किंग, लाइट एंड साउंड शो पर खर्च हो रहा है।
विराट स्वरूप की आधारशिला 25 नवंबर 2017 को ज्योतिसर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, हरियाणा के तत्कालीन राज्यपाल कप्तान सिंह सौलंकी और मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने रखी थी। हालांकि उस समय इस प्रोजेक्ट को एक साल के भीतर पूरा करने की योजना थी, लेकिन इसके डिजाइन और दिशा के बाद कोरोना लहर के बीच यह प्रोजेक्ट लटक गया। दिसंबर में होने वाले गीता महोत्सव में देश विदेश से कुरुक्षेत्र पहुंचने वाले लोगों के अलावा साल भर कुरुक्षेत्र आने वाले तीर्थ यात्रियों और सैलानियों के लिए अब कुरुक्षेत्र में यह नया आकर्षण होगा।