कोरोना की दूसरी लहर में स्वास्थ्य विभाग हर जरूरतमंद मरीज को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए भरसक प्रयास किया। बाकायदा जिलेभर के निजी अस्पतालों और कोविड केयर सेंटरों में ऑक्सीजन की खपत और सप्लाई पर निगरानी रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीमें गठित की गई थीं, जो रोजाना की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को सौंप रही थीं, लेकिन एलएनजेपी अस्पताल से ऑक्सीजन के 60 सिलिंडर गायब होने के बाद सामने आया कि यहां किसी अधिकारी और कर्मचारी को इसका जिम्मा ही नहीं सौंपा गया था।
ऑक्सीजन सिलिंडर गायब होने का मामला केयूके पुलिस थाने तक चला गया है, लेकिन अस्पताल प्रशासन द्वारा पुलिस को सौंपी गई शिकायत में ऑक्सीजन की सप्लाई कौन संभाल रहा था, इसका कहीं जिक्र ही नहीं किया गया। केयूके थाना प्रभारी मांगे राम का कहना है कि अस्पताल प्रशासन इस मामले की अपने स्तर पर ही जांच कर रहा है।
उधर, जिला अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सारा अग्रवाल का कहना है कि अगर पुलिस को कुछ जानकारी चाहिए तो उनसे पूछ सकते हैं। इस मामले में वे अपने स्तर पर भी जांच करा रहे हैं। दरअसल, पिछले दिनों एलएनजेपी अस्पताल के स्टॉक से ऑक्सीजन के 60 सिलिंडर गायब होने का मामला उजागर हुआ था, जिसमें 25 डी टाइप और 35 बी टाइप सिलिंडर शामिल हैं।
उधर, जिला अस्पताल में आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत ऑक्सीजन ऑपरेटरों का कहना है कि अस्पताल में दाखिल हर जरूरतमंद मरीज तक ऑक्सीजन पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन ऑक्सीजन के सिलिंडरों का रिकॉर्ड रखना प्रशासनिक अधिकारी और स्टोर कीपर की जिम्मेदारी थी। सिलिंडर कैसे गायब हुए, यह मालूम नहीं।