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कब होगी हरियाणा के किसानों की यूपी वाली फसल की बिक्री, असमंजस बरकरार

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। गेहूं की फसल के लिए दिसंबर माह से मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल हरियाणा के किसानों के लिए खुला है, पंजीकरण भी हो रहा है लेकिन अभी उन किसानों की समस्या का समाधान नहीं हुआ है जो रहते तो हरियाणा में हैं लेकिन उनकी जमीन सीमावर्ती यूपी आदि राज्यों में है। इनका आधार कार्ड हरियाणा का होने के कारण यूपी में उनकी फसल नहीं बिकती। हरियाणा सरकार इसलिए उनकी फसल नहीं खरीदती क्योंकि उनकी जमीन की खतौनी दूसरे राज्य की है। ये किसान लगातार मांग कर रहे हैं कि उनकी फसल को हरियाणा सरकार द्वारा खरीदा जाना चाहिए।
कर्ण बिहार निवासी किसान राजेश ने बताया कि उन्होंने कई साल पहले उत्तर प्रदेश के शामली जिले में जमीन खरीदी थी, लेकिन उनका आवास करनाल में होने के कारण आधार कार्ड भी यहीं का है। धान के सीजन में भी उनके धान को यूपी सरकार ने आधार कार्ड हरियाणा का होने के कारण नहीं खरीदा। हरियाणा सरकार ने सीमाएं सील करके हरियाणा राज्य में प्रवेश ही नहीं दिया। अब गेहूं की फसल के लिए भी हरियाणा सरकार के पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। यूपी की खतौनी भरते ही पंजीकरण रिजेक्ट हो जाता है। ऐसे हजारों किसान हैं, जिन्हें न तो यूपी अपना मानता है न ही हरियाणा। सरकार को ज्ञापन देकर कई बार मांग की जा चुकी है, उनकी समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। पोर्टल में कोई ऐसी व्यवस्था हो, जिसमें आधार कार्ड हरियाणा का होने व जमीन की खतौनी सीमांत राज्य की होने पर भी पंजीकरण किया जा सके।
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फसल नहीं पहुंच रही मंडी
हरियाणा के किसानों की यूपी वाली जमीन की फसल न खरीदने को लेकर आढ़ती भी चिंतित हैं, क्योंकि ये किसान हरियाणा के होने के कारण लगातार करनाल अनाज मंडी में ही अपनी फसल बेचते आ रहे हैं लेकिन सैकड़ों एकड़ फसल मंडी नहीं पहुंच पा रही है, जिससे आढ़तियों को भी नुकसान हो रहा है। नई पंचायत अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन करनाल ने पिछले दिनों इस समस्या के समाधान के लिए बैठक भी की थी। सरकार के नहीं सुनने पर इस मामले को कोर्ट में ले जाने पर विचार भी किया था।
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काफी प्रयास करने के बाद भी सरकार ने अभी तक हरियाणा के यूपी व अन्य सीमांत राज्यों में जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों की फसल की बिक्री को लेकर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। अब और इंतजार नहीं किया जा सकता है। अगले सप्ताह ही आढ़ती एसोसिएशन की बैठक बुलाकर मामले को कोर्ट में जाने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस मामले को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी, क्योंकि किसी भी किसान को यूं ही फसल बेचने से वंचित नहीं किया जा सकता।
- रजनीश चौधरी, प्रधान-नई पंचायत अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन करनाल
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