माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। करीब उन्नीस साल पहले आज ही के दिन करनाल की होनहार बेटी कल्पना चावला को हमने हमेशा के लिए खो दिया था। वर्ष 2003 के फरवरी महीने की पहली तारीख थी, जब कोलंबिया स्पेस शटल अंतरिक्ष में अपनी सफलता की इबारत लिखकर धरती पर लौट रहा था लेकिन धरती पर उतरने से चंद मिनट पहले ही आग के गोले में तब्दील हो गया। उसके साथ ही कर्णनगरी ने भी अपनी लाडली को खो दिया। कल्पना आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन करनाल ही नहीं पूरे देश के विद्यार्थियों के लिए वह एक प्रेरणा है। उसने अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला का गौरव हासिल किया।
मोंटू कहकर पुकारते थे परिजन
करनाल निवासी बनारसी लाल चावला व संज्योति के घर 17 मार्च 1962 को जन्मी कल्पना अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटी थी। उसे परिजन मोंटू कहकर बुलाते थे। जब उसका नाम स्कूल में लिखवाने की बारी आई तो प्रिंसिपल ने जो नाम सुझाए मोंटू ने खुद अपना नाम कल्पना पसंद किया और वही नाम स्कूल में लिखवा दिया। उसके पिता उसे डॉक्टर या शिक्षिका बनाना चाहते थे लेकिन कल्पना की दिलचस्पी शुरू से ही अंतरिक्ष व खगोलीय घटनाओं में थी।
वह स्कूल में कागज के जहाज बनाकर उड़ाया करती थी, एक बार तो शिक्षक ने उसकी कागज के जहाज उड़ाने की शिकायत उसके पिता से भी की थी। वह आकाश से गुजरते हवाई जहाज देखा करती थी, उसकी जिद पर उसके पिता उसे हवाई जहाज दिखाने हवाई पट्टी पर भी ले गए थे। वह अक्सर अपने पिता से अंतरिक्ष यान व आकाश में उड़ते हवाई जहाज आदि को लेकर सवाल पूछा करती थी। वह असफलता से भी कभी नहीं घबराती थी, न ही वह कभी हार मानती थी।
कल्पना 1982 में अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई के लिए अमेरिका रवाना हुई। उसने अमेरिका की नागरिकता ले ली थी। फ्रांस के एक फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर जान पियर से शादी कर ली। वह 1988 में नासा से जुड़ी। आखिरकार 1995 में नासा ने अंतरिक्ष यात्रा के लिए कल्पना को चुन ही लिया। उसकी अंतरिक्ष की पहली उड़ान एसटीएस 87 कोलंबिया शटल से 19 नवंबर 1997 से शुरू हुई जो 5 दिसंबर 1997 को संपन्न हुई। जिसमें उसने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताए और पृथ्वी की 252 परिक्रमाएं पूरी की। प्रथम उड़ान सफल होने के बाद कल्पना का भी हौसला बढ़ा था। इसके बाद दूसरी उड़ान 16 जनवरी 2003 को स्पेस शटल कोलंबिया से शुरू हुई। विज्ञान और अनुसंधान पर आधारित यह मिशन 16 दिवसीय था। मिशन सफलता की सीढ़ियां चढ़ चुका था। उसकी वापसी शुरू हो गई थी। वह एक फरवरी 2003 का दिन था, जब उसे धरती पर वापस लौटना था, लेकिन चंद मिनट पहले ही यान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही बिखर गया। कल्पना के साथ 6 अन्य अंतरिक्ष यात्रियों की भी मौत हो गई।