करनाल स्थित केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डीएस बुंदेला ने बताया कि चार दिसंबर दोपहर बाद से मौसम में परिवर्तन की संभावना है। कैस्पियन सागर, एरल व ब्लैक सी से उठी प्राकृतिक हलचल का प्रभाव रविवार की शाम से तेजी से नीचे की ओर रुख कर गया है। जिसके चलते चार जनवरी की रात कुछ जगहों पर हल्की बूंदाबांदी, पांच जनवरी को हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है।
मौसम की अनुकूलता गेहूं की किस्मों की क्षमता को देखते हुए इस बार बंपर उपज का अनुमान है। मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार ही किसान खरपतवार नाशक का छिड़काव, खाद डालने और सिंचाई करने की कार्ययोजना बनाएं। आने वाले समय में जब धुंध बढ़ेगी तो कीट व बीमारियों को लेकर खेतों का निरीक्षण करें।
ज्यादातर रकबे में डीबीडब्ल्यू-303, डीबीडब्ल्यू-222, डीबीडब्ल्यू-187 व एचबी-3226 किस्में हैं। 303 व 187 किस्म जब 45 से 50 दिन की अवस्था में हो तो उसमें वृद्धि नियंत्रक (क्लोरम क्वाट क्लोराइड 0.2 प्रतिशत) दो मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर एक छिड़काव मौसम खुलने पर कर दें। इन किस्मों में यह फायदेमंद रहेगा। यदि किसी किसान ने एचडी-2967 या एचडी-3086 किस्म लगाई है तो पीला रतुआ को लेकर सजग रहे। खेतों का नियमित निरीक्षण करें। - डाॅ. अनुज कुमार, प्रधान वैज्ञानिक, भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल।
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