करनाल। विदाई से कुछ समय पहले मानसून की बारिश किसानों के लिए आफत बन गई है। वीरवार को शहर के अलावा जिले के कई क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश हुई। इंद्री खंड के यमुना से सटे गांवों में भारी बारिश व तेज हवा के कारण धान व गन्ने की फसलें खेतों में बिछ गई और फसलों को भारी नुकसान हो गया। यही नहीं घीया, तोरी, करेला व खीरा की खड़ी फसलों की जड़ों में गलन रोग बढ़ने का अंदेशा है। इस बारिश के चलते आगामी कृषि कार्ययोजनाएं भी चौपट हो सकती हैं, क्योंकि सरसों, अगेता आलू व लहसुन बिजाई के लिए खेत तैयार करने की योजना रुक गई है।
30 सितंबर तक बारिश और बूंदाबांदी के आसार
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्र स्थित जिला स्तरीय कृषि मौसम सेवा इकाई के अनुसार 25 सितंबर तक बारिश की संभावना बनी रहेगी। बीच-बीच में धूप भी खिलेगी और फिर मौसम बदलने का अंदेशा रहेगा। दो दिन बाद मौसम खुलेगा। 30 सितंबर तक बूंदाबांदी की संभावना बनी रहेगी। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बने रहने के कारण मानसून का सीजन आगे खिंच गया। वायुमंडल में परिवर्तन की वजह से भी बारिश की तीव्रता इस बार ज्यादा रही है।
क्या कहते हैं उद्यान अधिकारी
जलभराव के कारण सब्जी की फसलों को काफी नुकसान हो रहा है। सब्जियों में गलन रोग बढ़ेगा। फसलों में कीड़े-मकौड़े ज्यादा प्रभाव डालते हैं। इस माह आगामी सब्जियों की बिजाई में देरी हो सकती है। आलू व लहसुन के लिए किसानों की खेत तैयार करने की योजना थी।
-डा. जोगिंद्र सिंह बिसला, जिला उद्यान अधिकारी
वैज्ञानिक की राय
इस समय तक मानसून चला जाता था किंतु अबकी बार जाते-जाते नुकसान दे रहा है। पूर्वानुमान है कि 30 सितंबर के बाद मानसून की विदाई शुरू हो जाएगी। ज्यादा बारिश के साथ तेज हवा चलने से फसलों को नुकसान का अंदेशा बन जाता है। किसान अपने खेतों से पानी की निकासी करते रहें।
-डा. डीएस बुंदेला, प्रधान वैज्ञानिक, केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, सिंचाई एवं जल निकास प्रभाग
धान में बीमारी फैलने का अंदेशा
धान में फाल्स स्मथ बीमारी का कारण बीज उपचार नहीं करना व यूरिया की ज्यादा खुराक देना होता है। बारिश के साथ यदि हवा चलती है तो इस बीमारी के कीटाणु उड़कर एक पौधे से दूसरे पौधे की बाली में जा सकते हैं। बारिश के कारण गिरी फसल में भी बीमारी के कीटाणु फैलने का अंदेशा बन जाता है। धान के जिन खेतों में दस दिन से ज्यादा समय तक पानी जमा रहता है उनमें भूरा तेला कीट का प्रकोप बढ़ने की भी संभावना होती है।
-डा. महा सिंह, समन्वयक, कृषि विज्ञान केंद्र करनाल, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय
किसानों का आया गश
- गांव डबकौली, चोरपुरा, चौरा, बयाना, रंदौली, करतारपुर क्षेत्र में खेतों में गन्ना व धान की पकी फसल जमीन पर बिछने व जलभराव का मंजर देख किसानों के पैरों तले जमीन खिसक गई। यमुना बेल्ट में घीड़ से आगे यमुनानगर की तरफ के गांवों में पूरे दिन बारिश चलती रही।
-नीरज शर्मा, किसान, डबकौली
प्रति एकड़ एक क्विंटल तक का होगा नुकसान
-वीरवार शाम हुई बारिश से धान की पकी फसल में प्रति एकड़ एक क्विंटल तक पैदावार का नुकसान होगा। अधपकी व बालियां निकलने की स्थिति वाले खेतों में दाने काले पड़ेंगे और खोखले हो जाएंगे। लगातार बारिश से प्रभावित खेतों में नुकसान दिख रहा है। जो फसल गिर गई है उस पर बार-बार पानी बरसने से दिक्कत बढ़ चुकी है। आगामी कृषि कार्ययोजनाएं प्रभावित हो गई हैं।
-धर्मवीर सतीजा, तकनीकी सलाहकार, किसान वेलफेयर क्लब
गन्ने को तुरंत उठाकर करें बंधाई
गन्ने की फसल को तुरंत उठाकर उसकी बंधाई करवा दें। शीघ्रता से खेतों से पानी की निकासी करें। यदि दस-पंद्रह दिन खेत में पानी टिकता है तो नुकसान होगा। गन्ना गिरने के बाद पत्तियां मिट्टी के संपर्क में आ जाती हैं और टूटने लगती हैं। जिस कारण फसल में कीड़े लगते हैं। अब तक की स्थिति तक गन्ने की तीन बार बंधाई हो जानी चाहिए थी। तब यदि गन्ना गिरता है तो झुंड को उठा दिया जाता है।
-डा. एसके पांडे, अध्यक्ष, गन्ना प्रजनन केंद्र