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लाडले के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच पाया विदेश गया पिता, चाचा ने दी मुखाग्नि

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प्रवीन कुमार
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इंद्री। जिस मासूम बेटे को अच्छी तरह पढ़ा-लिखाकर अफसर बनाने का सपना संजोकर पिता रामफल करीब चार माह पहले विदेश चला गया था, वही बेटा इस संसार से ही चला गया। इस घटना से पिता की तो जैसे जिंदगी ही उजड़ गई। हर कोई जस की मौत से दुखी है। बुधवार सुबह जैसे की बच्चे की मौत का पता चला पूरे गांव के लोग एकत्रित हो गए।
हर किसी की जुबां पर एक ही सवाल था कि आखिर इस मासूम ने किसी का क्या बिगाड़ा था। बुधवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे घर के पास लगते पशुओं के बाड़े में लगे टीनशेड के ऊपर जस का शव पड़ा था। लोगों ने बताया कि जस कुमार तेज बच्चा था। लाचार दादा धर्मपाल ने फफकते हुए कहा कि उन्हें तो अपनी आंखों पर यकीन भी नहीं हो रहा कि जिस पोते को वह सारा दिन हंसता-खेलता देखते थे, वह अब उनकी गोद में कभी नहीं खेलेगा। उनके घर का इकलौता चिराग बुझ गया। संवाद
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पांच माह पूर्व मनाया था जन्मदिन
ग्रामीणों ने बताया कि करीब पांच माह पहले ही परिवार ने हंसी-खुशी जस का पांचवां जन्मदिन मनाया था। पिता भी हंसी खुशी विदेश गए ताकि परिवार की आर्थिक हालत और बेहतर हो सके। उन्हें क्या पता था कि जिस बेटे की खातिर वह विदेश जा रहा है, वही उसे छोड़कर चला जाएगा।
सब कुछ उजड़ गया
चेहरे पर पड़ी झुर्रियां, लाचार आंखों से बहते आंसू, फफकते होंठों से दादा धर्मपाल ने धीमी आवाज में एक ही बात कही कि उनका सब कुछ उजड़ गया है। पोते की मौत से उनकी हिम्मत पूरी तरह से टूटी हुई नजर आई। बुधवार दोपहर करीब दो बजे जस को चाचा अमन ने गमगीन माहौल में मुखाग्नि दी। सभी लोगों की एक ही मांग है कि जस के हत्यारों को फांसी की सजा दी जाए। एहतियात के तौर पर गांव में पुलिस बल तैनात था।
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बेहोश हो गई मां
जस की हत्या के बाद मां मनीषा विलाप करते हुए एक ही बात कह रही थी कि मुझे पुलिस आठ बजे मेरे लाल से मिलवाने की बात कह रही थी, इसलिए मुझे उस पुलिसकर्मी से मिलवाओ, जिसने मुझे यह बात कही थी। यह कहते-कहते वह बेहोश हो गई।
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