माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। मांगों को लेकर आंगनबाड़ी वर्कर्स ने आंदोलन और तेज कर दिया है। बुधवार को जेल भरो आंदोलन के तहत करीब दो हजार आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स ने गिरफ्तारियां दी। दिनभर वे अपनी मांगों को लेकर गरजीं। करीब ढाई घंटे तक घेराव करते हुए लघु सचिवालय के मुख्य द्वार पर डटी रहीं। उनका कहना है कि जब तक सरकार मांगों को पूरा नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। करीब 36 दिन से वे हड़ताल पर हैं।
आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन के बैनर तले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुबह फव्वारा पार्क में एकत्रित हुईं। यहां से जुलूस के रूप में प्रदर्शन करती हुईं वे दोपहर करीब डेढ़ बजे लघु सचिवालय पहुंचीं। शाम करीब साढ़े चार बजे तक उन्होंने नारेबाजी करते हुए सरकार और जिला प्रशासन को कोसा। इसके बाद गिरफ्तारियां दीं।
प्रशासन की ओर से रोडवेज और पुलिस की 15 बसों में आंगनबाड़ी कर्मियों को गिरफ्तार किया गया। जिन्हें लघु सचिवालय से करीब 100 मीटर दूर एचएसवीपी कार्यालय के नजदीक तहसीलदार राजबख्श ने रिहा कर दिया। इस दौरान यूनियन ने अपनी मांगों का ज्ञापन भी उन्हें सौंपा। आंदोलन की अध्यक्षता यूनियन की प्रदेशाध्यक्ष रूपा राणा ने की। सीटू प्रदेश महासचिव जय भगवान, मिड-डे मिल यूनियन की राज्य प्रधान सरोज दुजाना, खेत मजदूर और सर्व कर्मचारी संघ के नेता मलकीत सिंह विशेष रूप से पहुंचे। यूनियन की राज्य उपप्रधान रूपा राणा, मधु शर्मा, जिला सचिव बिजनेश राणा, सीटू जिला प्रधान सतपाल सैनी, उपप्रधान ओ पी माटा ने कहा कि सरकार अपनी हठधर्मिता छोड़े और मांगों का समाधान करे।
आज उपायुक्त दिलवाएंगे सीएम से वार्ता का समय
अब तक आंगनबाड़ी कर्मियों से मुख्यमंत्री मनोहर लाल और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी पांच बार बातचीत कर चुके हैं। जेल भरो आंदोलन के बाद अब छठी बार सीएम से उनकी वार्ता होगी। जिला सचिव बिजनेश राणा ने बताया कि इसको लेकर आज यूनियन के प्रतिनिधिमंडल को उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने अपने कार्यालय में बुलाया है। बातचीत के बाद वे मुख्यमंत्री से वार्ता का समय दिलवाएंगे।
एस्मा लगाना भी लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन
आंदोलन में सीटू प्रदेश महासचिव जय भगवान ने कहा कि सरकार आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स के साथ धोखा कर रही है। उनकी जायज मांगों को भी नहीं माना जा रहा। ये मांगें भी वही हैं, जिनकी घोषणा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने की है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से एस्मा लगाना भी लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है, इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।