हरियाणा की करनाल रेंज साइबर क्राइम पुलिस थाने की टीम ने स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट हैक कर फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले दो आरोपी भाइयों को बिहार से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी करनाल समेत पूरे हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान सहित कई राज्यों की वेबसाइट हैक कर फर्जी प्रमाण पत्र जारी करते थे।
जांच में खुलासा हुआ है कि अब तक आरोपी 800 फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर चुके हैं। करनाल रेंज साइबर क्राइम पुलिस थाने के इंचार्ज कमलदीप राणा ने प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि इस मामले में मास्टर माइंड मध्य प्रदेश निवासी विकास फरार चल रहा है उसे जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। इस गिरोह में एक हजार से ज्यादा लोग शामिल हैं। इन आरोपियों का संपर्क सीएससी सेंटरों से भी था और वह इन आरोपियों के व्हाट्सएप ग्रुप से भी जुड़े थे। दोनों आरोपी भाइयों को जेल भेज दिया है।
बिहार से पकड़े गए
साइबर क्राइम थाना निरीक्षक कमलदीप राणा ने बताया कि उनकी सहयोगी टीम ने 28 अक्तूबर को दो आरोपी भाइयों संतोष व मंतोष निवासी गांव बरदौनी बादी जिला समस्तीपुर (बिहार) को उनके ही गांव से गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों को करनाल कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया। आरोपियों के कब्जे से दो लैपटॉप, दो मोबाइल, एक सीपीयू, एक मोरपो व एक एटीएम कार्ड बरामद किया गया। आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि उन्होंने हरियाणा, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों की वेबसाइट हैक कर करीब 800 फर्जी जन्म एंव मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए हैं।
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यह था मामला
थाना प्रभारी कमलदीप ने बताया कि 27 जुलाई को नागरिक अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी द्वारा पुलिस को शिकायत दी गई थी कि जिला नागरिक अस्पताल करनाल की जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र पंजीकरण इकाई के ई-मेल आईडी व पासवर्ड संबंधित इंचार्ज व कर्मचारियों के अलावा किसी से साझा नहीं किए जाते हैं। फिर भी 26 जुलाई को किसी ने आईडी व पासवर्ड से वेबसाइट हैक कर फर्जी हस्ताक्षर अपलोड कर ऑनलाइन जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। यह मामला दर्ज कर लिया गया था।
व्हाट्सएप ग्रुप से चलता था पूरा खेल
आरोपियों ने बताया कि उन्होंने जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र के नाम से कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए थे। उनमें सीएससी सेंटर के सदस्य भी जुड़े थे। जब किसी को जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना होता था तो वह ग्रुप में उसकी जानकारी डाल देते थे। इसके बाद उनका मास्टर माइंड आरोपी विकास उस प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की साइड हैक कर लिंक ग्रुप में डाल देता था और वह उस प्रमाण पत्र पर फर्जी हस्ताक्षर कर उसे जारी कर देते थे। इसके लिए 300 से एक हजार रुपये तक लेते थे।