- सड़कों पर सुरक्षित वाहन चलाना उददेश्य, प्रशिक्षण की इसी माह में शुरू की जाएगी व्यवस्था
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से पहले अब आमजन को नए बस स्टैंड के नजदीक स्थित आईडीटीआर (इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च) में प्रशिक्षण लेना होगा। ताकि जब चालक सड़क पर वाहन लेकर उतरे तो पूरी तरह सुरक्षित तरीके से वाहन चलाए। प्रशिक्षण को लेकर इसी माह में व्यवस्था शुरू की जाएगी।
इसे लेकर उपायुक्त अनीश यादव ने सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सभी एसडीएम को निर्देश जारी किए हैं। वर्तमान में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से पहले काफी लोग निजी केंद्रों पर प्रशिक्षण लेते हैं। प्रदेश सरकार की ओर से होंडा के साथ अनुबंध करके नए बस स्टैंड के साथ करीब 9.25 एकड़ जमीन पर आईडीटीआर बनवाया गया है।
करीब चार साल में 30 करोड़ से ज्यादा की लागत से इसका निर्माण हुआ। इसके बनवाने के पीछे मकसद युवाओं को करनाल में ही पक्के हैवी लाइसेंस के लिए प्रशिक्षण देना है। जबकि अब तक युवा पक्के हैवी लाइसेंस के लिए कैथल के पाडला में जाकर प्रशिक्षण लेते थे। केंद्र में आधुनिक सुविधाएं होने के कारण यहां पर पक्के हैवी लाइसेंस के अलावा लाइट एवं छोटे वाहनों के प्रशिक्षण की भी व्यवस्था है। ब्यूरो
आठ माह में महज 651 ने लिया प्रशिक्षण
हालात यह हैं कि जागरूकता एवं फीस स्ट्रक्चर में अंतर होने के कारण पिछले करीब आठ माह में 651 लोगों ने ही यहां से प्रशिक्षण लिया है। जबकि जिले के सभी उपमंडल को मिलाकर रोजाना 200 से ज्यादा लोग ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदन करते हैं।
21 से 30 दिन की अवधि के कोर्स
आईडीटीआर में स्मार्ट क्लास रूम, टेस्टिंग ट्रैक, ड्राइविंग लैब, सिमुलेटर, एडवांस ड्राइविंग टैस्ट, कैंटीन व हॉस्टल जैसी सुविधाएं हैं। लर्नर कोर्सों में थ्योरी और प्रैक्टिकल करवाया जाता है। लाइट व हैवी व्हीकल के 21 दिन से लेकर 30 दिन तक के कोर्स उपलब्ध हैं। कोर्स करने के बाद प्रशिक्षक को प्रमाणपत्र भी दिया जाता है। उपायुक्त अनीश यादव का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं से बचाव के लिए वाहन चालकों को सड़क नियमों की उचित जानकारी और ड्राइविंग का प्रशिक्षण होना जरूरी है।