हरियाणा के करनाल में सिविल लाइन पुलिस ने बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन में नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के कब्जे से आर्मी की एक वर्दी, दो वॉकी-टॉकी सेट, एक लैपटॉप, एक प्रिंटर, 3.5 लाख रुपये की नकदी भी बरामद की गई है। आरोपियों को पुलिस रिमांड के बाद शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। फिलहाल आरोपी पांच दिन के पुलिस रिमांड पर हैं।
जांच अधिकारी अभय राम ने बताया कि बसंत विहार निवासी प्रभजोत सिंह मूल रूप से कुरुक्षेत्र का रहने वाला है। उसने शिकायत दी थी कि उसकी और उसके एक दोस्त प्रदीप की मुलाकात आकाश धीमान निवासी जनकपुरी मुजफ्फर नगर से हुई थी। उसने उन्हें विवेक तरार से मिलवाया, जिसने उन्हें बताया कि वह बॉर्डर रोड ऑग्रेनाइजेशन में लेफ्टीनेंट कमांडो है।
उसने कहा कि अगर किसी को बीआरओ में भर्ती करवाना है तो उससे संपर्क कर लेना वह दोनों को सुपरवाइजर लगवा देगा। विवेक ने उन्हें एक व्यक्ति की नौकरी लगवाने का चार लाख रुपये खर्चा बताया। इस पर उन्होंने करीब 20 बच्चों को नौकरी लगवाने के नाम पर लाखों रुपये आरोपियों को दे दिए।
आरोपियों ने उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र दे दिए और ऋषिकेश प्राइवेट कैंप में बाकायदा उनकी कुछ दिनों की ट्रेनिंग भी करवाई गई। शिकायतकर्ताओं को विश्वास हो गया कि यह असली में नौकरी लगवाता है। उन्होंने भी खुद को सुपरवाइजर लगाने के लिए 4-4 लाख रुपये आरोपी को दे दिए।
कुछ दिनों उन्हें पता चला कि विवेक व उसके साथी लोगों के साथ नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करते हैं। इस शिकायत पर आरोपी विवेक, रवि व अन्य आरोपियों के खिलाफ थाना सिविल लाइन में मामला दर्ज किया गया। मामले की जांच करते हुए पुलिस ने 27 मार्च को दो आरोपियों विवेक तरार निवासी शामली उत्तर प्रदेश, रवि कुमार निवासी बागपत उत्तर प्रदेश को उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया।
आरोपियों को कोर्ट में पेश कर पांच दिन का पुलिस रिमांड लिया गया। इस दौरान आरोपियों ने अपने अन्य साथियों के नाम का खुलासा किया गया। जिसमें एक आरोपी दिवेश कुमार निवासी बहादुरपुर जिला हरिद्वार उत्तराखंड का नाम भी शामिल है। आरोपी दिवेश कुमार को भी उत्तराखंड के ज्वालापुर से गिरफ्तार किया गया।
लेफ्टिनेंट की वर्दी में रहता था ठग, 22 लोगों से की है धोखाधड़ी
पूछताछ में खुलासा हुआ कि एक आरोपी आकाश नौकरी लगने के इच्छुक लोगों को इन आरोपियों से मिलवाता था और उसके बदले में अपना कमीशन लेता था। आरोपी विवेक व रवि दोनों रुपयों का लेनदेन करते थे। आरोपी विवेक जब भी इन लोगों से बातचीत करने आता था या रुपये लेने आता था तो वह हमेशा लेफ्टिनेंट की वर्दी में होता था और उसकी गाड़ी पर भारत सरकार लिखा होता था। इससे सभी भ्रमित हो जाते थे और उसके उपर विश्वास कर बैठते थे। रुपये लेने के बाद नौकरी लगने वाले लोगों को फर्जी ज्वाइनिंग लेटर दे देते थे।
आरोपियों ने ऋषिकेश में एक प्राइवेट कैंप किराये पर ले रखा था। जहां पर आरोपियों के अन्य साथी नौकरी लगने वाले लोगाें को ट्रेनिंग करवाते थे और ज्वाइनिंग के लिए समय दे देते थे। नौकरी के फर्जी ज्वाइनिंग लेटर व अन्य जरूरी फर्जी कागजात आरोपी दिवेश अपने लैपटॉप पर तैयार करता था।
जब ऐसे लोगों को नौकरी में ज्वाइनिंग का इंतजार करते-2 काफी समय बीत जाता था तो उन्हें अपने साथ हुए फर्जीवाडे़ का पता चलता था। इस प्रकार आरोपियों ने करीब बाइस लोगों से लाखों रुपये की ठगी की थी।