करनाल। इस बार का पंचायत चुनाव जिले में विधान सभा सदस्यों की भी ताकत का एहसास कराएगा। यही कारण है कि करनाल जिले में पंचायत चुनाव मुख्यमंत्री मनोहर लाल सहित शेष अन्य चारों विधायकों की भी प्रतिष्ठा से सीधे तौर पर जुड़ा होगा। विधान सभा और लोक सभा का चुनाव 2024 में प्रस्तावित है, यही कारण है कि भाजपा, कांग्रेस, आप, इनेलो, जजपा सहित भी प्रमुख सियासी दल पंचायत चुनावों को गंभीरता से ले रहे हैं। आने वाले बड़े चुनाव की तस्वीर को गांवों की सरकार काफी हद तक साफ करेगी।
करनाल जिला सियासत पायदान पर भी काफी अहम है, क्योंकि करनाल से मुख्यमंत्री मनोहर लाल का गृह जिला है। इसके अलावा असंध को छोड़कर अन्य विधायक भाजपा के है या उसके समर्थक हैं। यही कारण है कि भाजपा ने पिछले कई सालों से पंचायत चुनाव की तैयारियां कर रखी हैं। कई बार अभियान चलाकर बूथों को मजबूत दिखी है। अक्सर कार्यक्रमों को बूथ स्तर तक किया जाता है, जिनका जिम्मा बूथ कमेटियों को सौंपा जाता है। कांग्रेस भी चुनावी तैयारियों को लेकर पीछे नहीं है। बात दीगर है कि कांग्रेस में गुटबाजी अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है लेकिन बूथ स्तर पर कांग्रेस की भी जबरदस्त तैयारी है।
पंजाब में पिछले दिनों सरकार बनने के बाद आम आदमी पार्टी भी हरियाणा में पैरों को मजबूत करने का पूरा प्रयास कर रही है। कांग्रेस व आप से भाजपा को खड़ी चुनावी चुनौती मिल सकती है। करनाल सीट से मुख्यमंत्री खुद ही विधायक हैं। ये दीगर बात है कि करनाल विधान सभा ग्राम पंचायतों की संख्या अन्य क्षेत्रों के अपेक्षा कम है लेकिन सबसे अधिक असरदार है। घरौंडा एक बड़ा क्षेत्र हैं, जहां से भाजपा के हरविंद्र कल्याण विधायक हैं। किसान आंदोलन के दौरान यहां भाजपा को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, हालांकि बाद मेें स्थिति बेहतर हो गई थी। पंचायत चुनाव में उन्हें भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने की चुनौती है। नीलोखेड़ी के विधायक धर्मपाल गोंदर यूं तो आजाद चुनाव जीते थे लेकिन भाजपा के समर्थक है, उनका क्षेत्र भी अधिकांश ग्रामीण अंचल ही है। उनके लिए भी पंचायत चुनाव काफी महत्वपूर्ण है।
इंद्री के विधायक राम कुमार कश्यप भी भाजपा के विधायक हैं और शहरी क्षेत्र से लगा पूरा इलाका ग्रामीण है। पिछले दिनों स्थानीय निकाय चुनाव हुए थे तो भी उन्होंने काफी सक्रिय भूमिका निभाई थी और उन्होंने अपने समर्थित प्रत्याशियों को विजयश्री भी दिलाई थी। अब ग्राम पंचायत चुनाव भी उनकी साख दांव पर होगी। इसके अलावा असंध के कांग्रेसी विधायक शमशेर सिंह गोगी की प्रतिष्ठा पर दांव पर हैं, कांग्रेस के वह जिले में इकलौते विधायक हैं, उनकी जिम्मेदारी असंध के साथ साथ जिले के अन्य क्षेत्रों में भी कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों को जीत दिलाने की है। हालांकि अभी नामांकन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, वास्तविक चुनावी तो उसके बाद ही सामने आएगी। कौन कौन सी पार्टी किस स्तर पर सिंबल देती है।