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यूं ही नहीं लगी नशे की लत, अपने भी जिम्मेदार

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सोनाली शर्मा
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करनाल। बच्चे और युवा नशे के दल-दल में यूं ही अचानक नहीं फंसते बल्कि इसके लिए उनके ही कोई करीबी या परिवार के सदस्य भी जिम्मेदार हैं। यह बात अस्पताल में उपचार के लिए आए बच्चों या युवाओं की काउंसलिंग के दौरान सामने आई है। काउंसलिंग में यह भी सामने आया कि रिश्तेदार या घर के सदस्यों को धुम्रपान या अन्य नशा करते देखकर ही बच्चों व युवाओं ने खुद पहले जिज्ञासा के चलते इनका सेवन शुरू कर दिया बाद में नशे के आदी हो गए और नौबत इलाज तक पहुंच गई। ऐसे ही 4 मामले सामने आए हैं जिसमें करीब 6 से 18 साल के बच्चे अपने ही घर से नशा करना सीख गए है। कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के डी-एडिक्शन विभाग में नशे के मरीजों के आंकड़े देखे जाए तो कोरोना काल में हर माह करीब डेढ़ सौ मामले नशे के आ रहे हैं। इससे पहले नशे के हर माह करीब 250-300 मामले आते थे।-संवाद
पिता-दादा ने मजाक में डाल दी हुक्का-बीडी पीने की आदत
छह साल के बच्चे को हुक्का और बीड़ी पीने की आदत हो गई। जब उसकी मां को पता चला तो वह उसे डॉक्टर के पास ले गई। काउंसलिंग के दौरान पता चला कि बच्चे को घर में उसके दादा-पिता ने पहले मजाक में हुक्का-बीडी पीने की आदत डाल दी बाद में वह उसका आदी हो गया। वह मल्टीपल पर्सनेलिटी डिसऑर्डर और नींद न आने की बीमारी से ग्रस्त था। इलाज के दौरान हुक्का व बीड़ी न मिलने पर डॉक्टरों को भी नुकसान पहुंचाता था। तीन माह लगातार इलाज के बाद बच्चे की नशा करने की आदत छूटी।
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सहपाठी करते थे टॉर्चर, इसलिए पीता था शराब
एक 14 वर्षीय बच्चे को शराब पीने की लत लग गई थी। जब घर में उसे डांट फटकार लगने लगी तो वह और ज्यादा पीने लगा। परिजन जबरदस्ती अस्पताल ले गए तो उसने नशा छोड़ने से इनकार कर दिया। मनोचित्सिक डॉ प्रशांत ने बताया कि एक सप्ताह काउंसलिंग के बाद बच्चे ने बताया कि उसे स्कूल में सहपाठी प्रताड़ित करते हैं इसलिए कई बार मरने की कोशिश भी कर चुका है। एक दिन उसने अपने पिता को रात में शराब पीते देखा तो खुद भी पिता द्वारा लाई गई शराब में से थोड़ी पी लेता था। बाद में आदी हो गया।
मां को ड्रग्स लेते देखा तो खुद भी करने लगी नशा
17 साल की लड़की अपनी मां को रोजाना ड्रग्स लेते देखती थी। पता चला कि उसके माता-पिता का तलाक हो चुका था। इस तनाव में उसकी मां रोज शराब और ड्रग्स लेती थी। बेटी अकेलेपन का शिकार होने लगी और उसने भी नींद की दवाइयां लेनी शुरू कर दी। नशे के कारण उसकी मां की मौत हो गई। इसके बाद लड़की नशे पर निर्भर हो गई। लेकिन जब उसकी नशा छोड़ने की इच्छा हुई तो अस्पताल में उसका इलाज शुरू किया गया और एक साल में उसका नशा छूट गया।
17 की उम्र से पीने लगा था शराब
एक 65 साल के बुजुर्ग ने बताया कि उसने 17 साल की उम्र में घर में पिता को देखकर शराब पीनी शुरू कर दी थी। शादी हुई तो नशे के कारण पत्नी के साथ संबंध खराब रहे, बच्चे भी कभी खुश नहीं रह पाए। 60 साल की उम्र में महसूस हुआ कि नशे के कारण परिवार कभी खुश नहीं रह पाया और बच्चे दूर हो गए। तब नशा छोड़ने की इच्छा हुई। अब नशा छोड़े हुए पांच साल हो गए हैं। हालांकि वह अब नशे के कारण शरीर में पैदा हुई समस्याओं और बीमारियों को ठीक करने में लगे हैं इसके लिए परिवार का उन्हें साथ मिल रहा है।
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नशा एक तरह की बीमारी है। बच्चों के लिए यह बहुत खतरनाक साबित हो रहा है। घर का माहौल ठीक रखना बहुत जरूरी है क्योंकि घर पर बच्चे का पहला स्कूल होता है। नशे की ये बीमारी जीवन की सभी खुशियों को गायब कर देती है। इसलिए इससे बच कर रहें।
-डॉ प्रशांत श्रीवास्तव, मनोचिकित्सक, मनोचिकित्सा विभाग, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल
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