संवाद न्यूज एजेंसी
तरावड़ी। सैकड़ों साल पहले जब दादूपुर गांव में जमीन के अंदर से खुदाई के दौरान एक शिवलिंग निकला तभी से यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना है। यहां साल में दो बार बड़ा मेला लगता है। सावन माह व महाशिवरात्रि पर हजारों शिवभक्त यहां कांवड़ लेकर पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं। मंदिर के पुजारी अकाशपुरी ने बताया कि मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में एक कुएं की खुदाई के दौरान एक पत्थरनुमा शिवलिंग पर चोट लगी तो उसमें से दूध की धारा बह निकली। तभी खुदाई का कार्य रोक दिया गया। दो-तीन दिन बाद यह शिवलिंग जमीन से स्वयं दो-तीन फुट ऊपर आ गया। इसमें से दूध की धारा निकलने से इसका नाम दूधेश्वर महादेव नाम पड़ गया।
अब यहां भव्य मंदिर बन चुका है। गांव के लोगों के अनुसार जो श्रद्धालु मनोकामना करते हैं, उनकी दूधेश्वर महादेव कामना पूरी करते हैं। एक मार्च को महाशिवरात्रि से पूर्व मंदिर में रंग रोगन व सजावट कार्य चल रहा है।
बचपन से ही इस मंदिर में आते हैं। हमने जो भोले बाबा से मांगा, वह हमें मिला है। इनका आशीर्वाद हमेशा मिलता रहे, यही बाबा के चरणों में प्रार्थना है। यहां पर आने वाले भक्तों की सब मनोकामना पूरी होती हैं।
मेहर सिंह, गांव दादूपुर
जब भी विदेश से आता हूं, यहां आकर 15 दिन रहकर शिव बाबा की सेवा करता हूं। इनका मुझ पर हमेशा आशीर्वाद बना रहता है। मेरी हर मनोकामना पूरी हुई है। विदेशों से भोले बाबा के भक्त यहां पर आते रहते हैं।
- सुल्तान मराठा, एनआरआई
इस प्राचीन मंदिर में दूर-दूर से शिवभक्त आते हैं। सावन मास की शिवरात्रि में शिवभक्त हरिद्वार से कांवड़ लाकर भोले बाबा का जलाभिषेक करके पूजा-अर्चना करते हैं और उनकी हर मनोकामना पूरी होती है।
बलविंदर सिंह दादूपुर