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संसद में फिर उठा करनाल में ट्रेनों के ठहराव का मुद्दा

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। संसद में एक बार फिर स्मार्ट सिटी और ऐतिहासिक धरोहर करनाल रेलवे स्टेशन पर कई प्रमुख ट्रेनें न रुकने का मुद्दा उठा। रेलमंत्री अश्वनी वैष्णव को उस समय करनाल के सांसद संजय भाटिया को बीच में रोककर जवाब देना पड़ा, जब सांसद ने कहा कि रेल मंत्रालय से मिले जवाब से वे संतुष्ट नहीं हैं। सांसद ने यहां तक कह दिया कि यदि करनाल, पानीपत में ट्रेनों के रुकने से घाटा होता है तो वह संसद से मिलने वाले वेतन को सरेंडर करने को तैयार हैं।
सांसद भाटिया ने 24 मार्च को भी करनाल व पानीपत में ट्रेनों के न रुकने, करनाल स्टेशन को जंक्शन बनाने और मानक के विपरीत टोल टैक्स प्लाजा स्थापित कर टैक्स वसूली का मुद्दा उठाया था। उस दिन संसद में राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को 60 किमी के अंदर वाले टोल प्लाजा को समाप्त करने का एलान करना पड़ा था। सांसद द्वारा उठाए गए मामलों में रेल मंत्रालय के जवाब पर चर्चा में बुधवार को सांसद ने फिर वही मुद्दा गंभीरता से उठाया।
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उन्होंने कहा कि वह खुद रेल से यात्रा करते हैं, रेल मंत्रालय का जवाब उनके प्रश्न के अनुरूप नहीं है। इस पर रेलमंत्री ने सांसद को बीच में रोकते हुए करनाल को महत्वपूर्ण स्टेशन बताते हुए कहा कि करनाल से 109 ट्रेनें गुजरती हैं, इनमें से 46 एक्सप्रेस व पांच पैसेंजर गाड़ियों सहित 51 गाड़ियां हैं, फिर भी सांसद की यदि कोई और मांग है तो वह उनसे मिलें, इस पर वह विचार करेंगे।
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नहीं रुकती गरीब रथ
सांसद ने कहा कि करनाल टैक्सटाइल हब है, हजार करोड़ से भी ज्यादा टर्नओवर है, स्मार्ट सिटी है, 130 वर्ष पुराना स्टेशन है। हजारों श्रमिक बाहरी राज्यों से आकर काम करते हैं, लेकिन गरीब रथ यहां नहीं रुकती। दादर एक्सप्रेस अमृतसर से मुंबई जाती है, घरौड़ा, तरावड़ी में रुकती है, वापसी में नहीं रुकती। कोरोना काल से पहले डेली पैसेंजर ट्रेनों को बंद कर दिया है, जबकि दिल्ली में तीन ट्रेनें श्रम शक्ति, शिव गंगा व प्रयागराज दिल्ली स्टेशन पर 10 से 17 घंटे खड़ी रहती है, यदि इन्हें पानीपत जंक्शन तक कर दिया जाए तो राजस्व का बड़ा फायदा होगा। इस पर एक बार फिर रेलमंत्री को उठना पड़ा। उन्होंने कहा कि पूर्व रेलमंत्री पीयूष गोयल ने अपने कार्यकाल में सांइटिफिक स्टडी कराई थी, उस पर नेशनल टाइम टेबल तय किया गया, यही कारण है कि आज ट्रेनें समय पर पहुंच रही है, लेकिन फिर भी जहां जरूरत होती, वहां विशेष एक्सपेरीमेंट कराकर आगे निर्णय लिया जाएगा।
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