स्मार्ट सिटी के तहत शहर में 25 हजार एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। इसका सर्वे शुरू हो चुका है। एचपीएल इलैक्ट्रिक एंड पावर लिमिटेड कंपनी इस प्रोजेक्ट को पूरा करेगी। अधिकारियों के मुताबिक अगले छह माह में काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद कर्ण नगरी स्ट्रीट लाइटों की दूधिया रोशनी में नहाएगी।
वर्तमान में सड़कों पर अधिकतम स्ट्रीट लाइट पारंपरिक तकनीक की हैं, जो एक निश्चित समय पर चालू और बंद होती हैं और रात भर एक समान प्रकाश देती हैं। इससे बिजली की अत्याधिक खपत होती है। जबकि एलईडी लाइटें एक लचीले डिमिंग शेड्यूल पर आधारित होंगी, जिसमें निश्चित समय पर प्रकाश की तीव्रता को समायोजित भी किया जा सकेगा। प्रोजेक्ट के मुताबिक स्मार्ट कनेक्टिड लाइटिंग सिस्टम वायरलेस विकेंद्रीकृत नेटवर्क का हिस्सा है। जोकि केंद्रीय डाटा और प्रबंधन प्लेटफार्म से जुड़ा है और स्मार्ट सेंसर और एकीकृत उपकरणों से लैस है। लाइटों के लगने के बाद 10 वर्ष तक इसका संचालन, रख-रखाव और निगरानी कंपनी की ही होगी।
सर्वे में डार्क स्पॉट करेंगे चिह्नित
सर्वे के दौरान शहर में जहां-जहां भी डार्क स्पॉट हैं, उनकी पहचान की जाएगी और उसे खत्म करने के लिए स्ट्रीट लाइट के बुनियादी ढांचे को जोड़ा जाएगा। पारंपरिक स्ट्रीट लाइटों को 40, 70, 90, 150 और 200 वाट की स्मार्ट एलईडी स्ट्रीट लाइटों से बदला जाएगा। 150 वाट से कम की एलईडी लाइट को फिडर आधारित पैनल से और इससे अधिक को अलग-अलग कनेक्टर से जोड़ा जाएगा। एजेंसी जीआईएस मानचित्र पर स्ट्रीट लाइट की मैपिंग करेगी।
पारंपरिक स्ट्रीट लाइटों का ढांचा भी बदलेगा
बिजली बचाने के लिए स्मार्ट लाइट में डिमिंग शेड्यूल समायोजित होता है। मौजूदा पारंपरिक स्ट्रीट लाइटों को चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट लाइटों में बदला जाएगा। इसके तहत स्ट्रीट लाइट के पोल को बदलने के साथ-साथ अंडरग्राउंड और ओवर हैड केबल वायरिंग से बुनियादी ढांचे को भी नया रूप दिया जाएगा। स्ट्रीट लाइट से होने वाली बिजली चोरी भी पकड़ी जा सकेगी।
- निशांत कुमार यादव, डीसी एवं सीईओ, स्मार्ट सिटी