फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

करनाल: ड्यूटी पर तैनात जवान की बर्फबारी में तबियत बिगड़ने से गई जान, तीन बेटियों ने पार्थिव शरीर को दी मुखाग्नि

Sun, 16 Jan 2022 11:24 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल/निसिंग (हरियाणा)

सार

तिरंगे में लिपटा शव गांव पहुंचा तो देखकर हर आंख नम हो गई। उनका गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ। तीन बेटियों ने पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी।
विज्ञापन
तिरंगे में लिपटा गांव पहुंचा सूबेदार रमेश चंद का शव। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरियाणा के करनाल जिले के निसिंग क्षेत्र से जम्मू के बनिहाल में राष्ट्रीय रायफल थल सेना में सूबेदार के पद पर तैनात जाणी गांव के रमेश चंद-46 की ड्यूटी के दौरान भारी बर्फबारी में अचानक तबियत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। रविवार को पैतृक गांव जाणी में राजकीय सम्मान के साथ उनको अंतिम विदाई दी गई। उनकी तीन बेटियों ने पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। इस दौरान श्मशान घाट में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। 

विज्ञापन


सूबेदार को अंतिम विदाई देने के लिए ग्रामीणों के साथ ही धार्मिक, राजनीतिक व सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग पहुंचे। उनकी अंतिम यात्रा में घरौंडा विधायक हरविंद्र कल्याण, असंध के पूर्व विधायक जिले राम शर्मा, नरसिंह बबलू, थल सेना से नायब सूबेदार सकल देव सिंह, नायब सूबेदार जसबीर सिंह, नायब सूबेदार नदीम अली शामिल हुए। हरविंद्र कल्याण ने सैनिक के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धाजंलि दी। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री मनोहर लाल से इस संबंध में वार्ता कर सैनिक के परिजनों को हर संभव सहायता का प्रयास किया जाएगा। 

काफी दिनों से थे बीमार

सूबेदार रमेश चंद्र के साथी अधिकारी नायब सूबेदार नदीम अली ने बताया कि वे उनके साथ 12 राष्ट्रीय रायफल में जम्मू के बनिहाल में पोस्ट पर तैनात थे। विषम परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह किए बगैर वे लगातार ड्यूटी करते रहे। कुछ दिन पहले उनकी तबीयत बिगड़ गई तो उन्हें मिलिट्री अस्पताल उधमपुर में इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो पाया। इलाज के दौरान ही 15 जनवरी को सुबह तीन बजे सूबेदार रमेश चंद्र की मौत हो गई।

बेटियों ने दी मुखाग्नि, अफसर बनाने का था सपना

सूबेदार की तीन बेटियां काजल, निकिता व पायल ने अपने बहादुर पिता के अंतिम संस्कार की रस्म को निभाते हुए मुखाग्नि दी। नरसिंह बबलू ने बताया कि वे अपनी बेटियों को सेना में अफसर बनाने की अक्सर बात करते थे, इसलिए उन्होंने बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाई। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही सूबेदार छुट्टियां बिता कर गांव से गए थे। 

तिरंगा सीने से लगा रोया पिता, मां बोली-हर जन्म में मिले ऐसा बेटा

सैनिक सम्मान के दौरान तिरंगा में लिपटे सूबेदार रमेश चंद्र के पार्थिव शरीर को गांव में लेकर पहुंचे अधिकारियों ने उनके पिता मानसिंह को सौंप दिया। इस दौरान बेबस पिता तिरंगे को सीने से लगाकर फूट फूटकर रो पड़े। वहीं, मां भुगडी देवी भी अपने कलेजे के टुकड़े को तिरंगे में लिपटा देखकर चीख पड़ी। रोते हुए बोली कि हर जन्म में उसे रमेश जैसा बेटा नसीब हो, ये कहते हुए वे बेहोश हो गई।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें