अब मूक-बधिरों को सरकारी कार्यालयों में अपनी बात समझाने के लिए ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी पड़ेगी। हरियाणा के करनाल में विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उनकी सांकेतिक भाषा सीखेंगे और उनसे उनकी भाषा में बात करके उनका दर्द समझेंगे और समाधान भी करेंगे। जिला प्रशासन की ओर से सभी सरकारी विभागों के अधिकारी और कर्मचारियों को सांकेतिक भाषा सिखाई जाएगी, ताकि किसी भी कार्यालय में आने वाले मूक-बधिरों को काम कराने में कोई दिक्कत न आए।
सांकेतिक भाषा की प्रशिक्षण कक्षा के पहले चरण में उन चार विभागों को शामिल किया गया है, जहां सबसे ज्यादा मूक-बधिरों को परेशानी आती है। इनमें स्वास्थ्य विभाग, बैंक, डाक घर और रोडवेज शामिल हैं। डॉक्टर को सांकेतिक भाषा का ज्ञान न होने पर मूक-बधिर के इलाज में परेशानी आती है। बैंक व डाक घर कर्मी खाता खोलने व लेन-देन संबंधित कार्य नहीं कर पाते। इसके अलावा रोडवेज में कंडक्टर को मूक-बधिर का टिकट काटने में दिक्कत आती है।
प्रधानमंत्री ने सांकेतिक भाषा को मान्यता दी है। कई विभागों में मूक-बधिरों की बात समझ न आने की शिकायतें भी आई थी। वे भी हमारे समाज का हिस्सा हैं, उनके दर्द को समझते हुए सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारियों को सांकेतिक भाषा सीखने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। - निशांत कुमार यादव, उपायुक्त
विभागों के अधिकारी और कर्मचारी के अलावा मूक-बधिरों के हित में कोई भी इच्छुक व्यक्ति आकर निशुल्क प्रशिक्षण ले सकता है। संस्थान का प्रशिक्षक ही सभी को प्रशिक्षण देगा। मूक-बधिर बच्चों के अभिभावकों के लिए शनिवार को कक्षा लगती है। - दिनेश सिंह, सहायक निदेशक, माता प्रकाश कौर श्रवण वाणी केंद्र