रोहतक के गुरुद्वारे में 13 दिन ठहरे थे
गीत की शुरुआत में सबसे पहले रोहतक का गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दिखाया गया है। गांव लाखनमाजरा के इस गुरुद्वारे में गुरु जी 13 दिन ठहरे थे। सितंबर 1675 में गुरु जी कश्मीरी पंडितों की फरियाद सुनकर हिंदू धर्म को बचाने के लिए पंजाब के श्री आनंदपुर साहिब से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। यहां उन्होंने संगत को हिंदू धर्म में डटे रहने का संदेश दिया। इसके अलावा कैथल के गढ़ी नजीर गुुरुद्वारे में भी गुरु तेग बहादुर जी अपनी शहीदी यात्रा के दौरान ठहरे थे। इसी तरह यमुनानगर, करनाल और कुरुक्षेत्र के गुरुद्वारों का भी गुरु के इतिहास से संबंध है।
श्री लखनौर साहिब है माता गुजरी का जन्म स्थान
गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब अंबाला श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की पत्नी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की मां माता गुजरी का जन्म स्थान है। बाद में उनके माता-पिता करतारपुर साहिब चले गए, जहां उन्होंने श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी से विवाह किया। जब श्री गुरु तेग बहादुर जी और माता गुजरी जी बिहार दौरे पर थे, वहां बाल गोबिंद राय (गुरु गोबिंद सिंह जी) का जन्म हुआ था। इस गुरुद्वारे में गुरु जी से जुड़ी कई ऐतिहासिक चीजें आज भी विराजमान हैं।
इन गुरुद्वारों के गीत में होंगे दर्शन
गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब, रोहतक
गुरुद्वारा श्री बंदा साहिब झीवरहेड़ी (करनाल)
गुरुद्वारा श्री गढ़ी साहिब, गढ़ी नजीर कैथल
गुरुद्वारा श्री थानेसर (कुरुक्षेत्र)
गुरुद्वारा श्री बुरिया साहिब, यमुनानगर
गुरुद्वारा श्री तजेवाल साहिब, यमुनानगर
गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब, अंबाला