करनाल। पंचायती और निकाय चुनाव को लेकर भाजपा की बैठक में किसानों के संभावित विरोध के मद्देनजर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के लिए मजबूत किलेबंदी की। देर रात तक प्रशासन ने बैठक करके ऐसा सुरक्षा चक्रव्यूह तैयार किया कि शनिवार को बैठक के दिन आंदोलनकारी किसान शहर में प्रवेश नहीं कर पाए। नाकाबंदी में लगाए भारी वाहनों को प्रशासन ने शुक्रवार की देर रात ही हाईवे से पकड़ा था। नाकों पर खड़ा कर इनकी चाबियां और दस्तावेज कब्जे में ले लिए गए थे।
किसानों के विरोध को देखते हुए आयोजन स्थल के अलावा शहर में प्रवेश के हर रास्ते पर शनिवार सुबह से ही पुलिस ने नाकाबंदी कर रखी थी। 100 से ज्यादा डंफर और ट्रकों को खड़ा कर रास्ते बंद किए गए। वहीं कुछ जरूरी जगहों पर कंटीले तार से बैरिकेड लगाए गए। आयोजन स्थल रेलवे रोड 14 घंटे तक पूरी तरह से सील रहा। सुबह करीब तीन बजे ही रेलवे रोड पर रामगढ़िया चौक से लेकर विश्वकर्मा चौक तक कड़ी नाकाबंदी करके सील किया गया। यहां पूरा दिन भाजपा के नेताओं, पुलिस और मीडिया के अलावा किसी को भी प्रवेश नहीं दिया गया। पहली बार आयोजन स्थल पर बिना विरोध के कार्यक्रम संपन्न हुआ।
11 जनवरी के कैमला कांड से मिली सीख
11 जनवरी को कैमला गांव में सीएम का किसान महापंचायत कार्यक्रम था। उस दौरान किसानों के आगे पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो गई थी। पुलिस की ओर से किसानों को रोकने के लिए लगाए गये पांच नाके नाकाफी साबित हुए। रणनीति के तहत किसानों ने खेतों का सहारा लिया और कार्यक्रम स्थल तक पहुंच गए और टेंट तक उखाड़ दिया गया। ऐसे हालात से सीख लेते हुए इस बार शहर के बीचोबीच होने वाले आयोजन के लिए प्रशासन ने शहर के प्रवेश मार्गों पर ही नाकाबंदी कर दी।
पहली बार आयोजन स्थल पर नहीं हुआ कोई विरोध
-कैमला में हुए विरोध और तोड़फोड़ के बाद सीएम, सरकार और भाजपा के प्रत्येक बड़े कार्यक्रम के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं।
- पांच जून को सेक्टर-5 में ऑक्सी वन मंडल परियोजना की शुरुआत करने सीएम पहुंचे थे। इस दौरान भी कार्यक्रम के बाद किसानों ने आयोजन स्थल पर प्रदर्शन कर कृषि कानूनों की प्रतियां फूंकी थी।
-तीन जुलाई को भाजपा के स्थानीय नेताओं की बैठक लेने जब सीएम रेलवे रोड के इसी होटल में आए थे, तो उस समय भी इस मार्ग को सील किया गया था, इस दौरान किसानों ने रामगढ़िया चौक पर हंगामा और भाजपा के झंडे भी फाड़े थे।
-गत माह पंचायत भवन में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक के दौरान भी अग्रसेन चौक से एनडीआरआई तक रास्ते सील किए गए। उस दौरान भी एनडीआरआई चौक पर किसानों ने आंदोलन किया और कई किसान हिरासत में भी लिए गए थे। जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।