करनाल। राजीव कालोनी निवासी सुनील के परिजनों ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि पुलिस समय पर कार्रवाई करती तो सुनील की जान बच जाती। सुनील के पिता प्रेमचंद ने बताया कि 9 अगस्त को उन्होंने सेक्टर-32, 33 थाना पुलिस को सुनील के लापता होने की शिकायत दे दी थी और 8 अगस्त को जब सुनील की स्कूटी आरोपी के घर के समीप मिली थी तो उस दौरान भी पुलिस को मौके पर बुलाया था। उन्होंने पुलिस को मामले की जानकारी दी थी कि सनेहा ढुल ने फोन कर सुनील को बुलाया था, तभी से वह लापता है लेकिन पुलिस ने उनकी सभी बातों को अनसुना कर दिया और लोकेशन निकलवा रहे, मोबाइल ट्रेस करने का आश्वासन देते रहे। वहीं 11 अगस्त को सुनील की पत्नी ने दोबारा पुलिस को शिकायत दी और अपहरण के भी आरोप सनेहा ढुल पर लगाए थे। इस दौरान यह मामला सीआईए-2 में चला गया था लेकिन सीआईए-2 पुलिस ने भी जांच नहीं की। वह अपने स्तर पर ही कभी हरिद्वार, कभी अंबाला सुनील को तलाशते रहे। लापता होने के पांच दिन बात जब सुनील का मोबाइल मिला, तब भी उन्होंने पुलिस को पूरी जानकारी दी। पुलिस इन 11 दिनों में गंभीरता से जांच करती तो सुनील की जान बच सकती थी। उन्होंने आरोपी सनेहा से कड़ी पूछताछ नहीं की।
पिता प्रेम चंद ने बताया कि जब आरोपी सनेहा ने सुनील के पास फोन कर उसे धमकी देते हुए बुलाया था तो सुनील ने इस बारे में अपने दोस्त से बात की थी। उसके दोस्त ने उसे अकेले न को भी कहा था फिर भी वह अकेला चला गया ताकि मामला किसी तरह निपट जाए। उस दिन उसका छोटा भाई अनिल घर पर नहीं था।
बेटा-बेटी के सिर से उठा पिता का साया
सुनील सैनी 19 साल से अनमोल गार्डन में मैनेजर था। उसका एक 16 साल का बेटा है और बेटी 8 साल की है। दोनों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। सुनील के पिता व छोटा भाई अनिल अलग घर में सुनील के पास के घर में ही रहते हैं।
लापता के मामलों की पुलिस नहीं करती गंभीरता से जांच
हर रोज लापता के मामले पुलिस के सामने आते हैं। पुलिस इन मामलों को दर्ज कर लेती है लेकिन गंभीरता से जांच नहीं करती। मोबाइल की लोकेशन निकालना, अखबार में इस्तहार तक ही सीमित रहती है। इस मामले में तो परिजनों ने आरोप भी लगाए थे फिर भी पुलिस मोबाइल लोकेशन का ही हवाला देती रही।